सिंचाईं का आगाज …. तवा डेम से नहर में छोड़ा 738 क्यूसेक पानी    

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 नहर पूजन में शामिल किसान

बांयी तट नहर में छोड़ा पानी

अनोखा तीर, हरदा। रबी सीजन में सिंचाईं के लिये तवा डेम से बुधवार को पानी छोड़ दिया गया है, जो अगले 48 घंटे के भीतर जिले में एन्ट्री करेगा। इसी के साथ क्षेत्र में सिंचाईं का सिलसिला जोर पकड़ेगा। इस दौरान तवा डेम पर नहर पूजन का आयोजन हुआ। जिसमें कृषक प्रतिनिधियों ने हिस्सा लिया। वहीं नजर पूजा कर जल देवता से क्षेत्र में हरियाली एवं धन-धान्य की प्रार्थना की। इस मौके पर सिंचाईं विभाग के वरिष्ठ अधिकारियों के साथ साथ डेम प्रबंधन मौजूद रहा। इस अवसर पर पूजा-अर्चना पश््चात नहरों में पानी छोड़ा गया। इस मौके पर जय जवान-जय किसान के जयघोष से पूरा परिसर गूंजायमान हो गया। इधर, अधिकारिक जानकारी के मुताबिक 25 अक्टूबर को शाम 5 बजे हरदा एवं नर्मदापुरम जिले की सिंचाई व्यवस्था के लिये तवा की बांयी तट नहर में 738 क्यूसेक पानी छोड़ा है। यह गेज प्रारंभिक तौर पर निर्धारित किया है, जो कि मांग अनुरूप धीरे-धीरे बढ़ाया जाएगा। इस मौके पर भारतीय किसान संघ के दीपचंद नवाद ने कहा कि तवा डेम के कारण क्षेत्र में उन्नति के द्वार खुले हैं। परंतु समय के मान तथा भविष्य को दृष्टिगत रखकर वर्तमान में जल संरक्षण का मुद्दा शीर्ष पर हैं। इस दिशा में शासन-प्रशासन समेत जल संरक्षण की मुहिम से जुड़े लोग प्रयासरत हैं। ऐसे वक्त पर किसानों का भी दायित्व बढ़ जाता है कि सिंचाईं समेत अन्य कार्यो में पानी की महत्ता को समझें। उसे व्यर्थ ना बहाये बल्कि सद्उपयोग करें, ताकि भविष्य में जल संकट जैसी आपदा से जूझना ना पड़े। इस अवसर पर तवा परियोजना के अधीक्षण यंत्री आरआर मीणा, अनुविभागीय अधिकारी एनके सूर्यवंशी, राजकुमार सोनारे, भारतीय किसान संघ के जिला जल संसाधन विभाग के प्रभारी दीपचंद नवाद, रेवाशंकर दोगने, बलबीर राजपूत, प्रेमनारायण बेड़ा, रामशंकर नवाद सहित अन्य किसान उपस्थित रहे।

पहल, जो बन चुकी अब परंपरा

इस संबंध में भारतीय किसान संघ के जिला जल संसाधन प्रभारी दीपचंद नवाद ने बताया कि पिछले 24 वर्षो से नहर पूजन का क्रम जारी है, जो कि ग्राम बाजानिया स्थित अजनई उपनहर की टू-आर माइनर से प्रारंभ की थी। किसान और किसानी को गौरान्वित करने वाली बात है कि अब यही नहर एवं जल पूजा तवा डेम सहित प्रदेश में सिंचाईं के अन्य केन्द्र बिन्दूओं पर उत्साह के साथ की जा रही है।

जल ही जीवन, इसे बचायें

उन्होंनें बताया कि इसके पीछे मुख्य उद्देश्य यह कि आम जनता खासकर किसानों में नहर एवं जल के प्रति सम्मान का भाव पैदा करना है। इस मौके पर उन्होंनें पानी की एक-एक बूंद का को सहेजने के साथ साथ उसके सद्उपयोग का संकल्प लिया, वहीं अपील भी की। ताकि जल संरक्षण के बूते आगामी ग्रीष्मकालीन मूंग की फसल पानी की मदद सुनिश्चित हो सके।

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