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Thursday, 22 October 2026
धर्म हरदा

सेवा, आराधना व अनुष्ठानों की तैयारी में लीन श्रद्धालु

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भक्ति का पर्व….

सर्वपितृमोक्ष अमावस्या आज ! कल से शारदीय नवरात्रा…..

 

अनोखा तीर, हरदा। आज सर्वपितृमोक्ष अमावस्या के साथ ही शनिवार को 16 दिवसीय श्राद्धपक्ष का समापन होगा। इसी के साथ पर्व पर स्नान-ध्यान व दान-पुण्य की दृष्टि से हंडिया और नेमावर स्थित नर्मदा नदी के प्रमुख घाटों पर श्रद्धालुओं की भीड़ उमड़ेगी। पर्व पर श्रद्धालु पंडितों के मंत्रोच्चार के बीच अपने-अपने पितृ आराधना व जल तर्पण के साथ नमन करेंगे। इधर, पर्व की पूर्व संध्या यानि शुक्रवार शाम से हरदा-देवास समेत अन्य जिलों से भक्तों का यहां पहुंचने का सिलसिला प्रारंभ हो गया था। बता दें कि सर्व पितृमोक्ष अमावस्या के दूसरे दिन १५ अक्टूबर रविवार से शारदीय नवरात्रि प्रारंभ होने जा रही है। जिसके चलते पर्व का महत्व ओर बढ़ जाता है। यही कारण है कि हर साल की तरह यहां धर्मप्रेमीजनों का जमावड़ा लगेगा। वे स्नान कर पवित्र नर्मदा जल अपने साथ लेकर जाएंगे, ताकि नौ दिवसीय देवी आराधना में पूर्ण विधिपूर्वक तल्लीन हो सके। इन सबके बीच सेवा, आराधना व अनुष्ठानों की तैयारियों ने जोर पकड़ रखा है। हवन-पूजन समेत अन्य कार्यो के लिये सामग्री जुटाई जा रही हैं।

सुंदर पांडालों में विराजेगी मॉ दुर्गा

उधर, नवरात्रि में पूरे 9 दिन मातारानी की सेवा का संकल्प कर ऊंचे-ऊंचे पांडालों को मूर्तरूप दिया जा रहा है। जहां मॉ जगतजननी की सुंदर व मनमोहक प्रतिमाएं विराजित होंगी। माता भक्तों से मिली जानकारी के अनुसार हर साल की तरह इस साल भी पंडितों के सानिध्य में विधि-विधान से मूर्ति की घटस्थापना कराएंगे। जानकारी के अनुसार शहर में करीब डेढ़ दर्जन स्थानों पर मॉ दुर्गा की मनमोहक झांकियां सजेगी।

भक्ति व अनुष्ठानों का होगा समागम  

9 दिवसीय नवरात्रा दौरान भक्ति, सेवा व अनुष्ठान का समागम होगा। शहर के प्रमुख देवी मंदिरों के साथ ही धार्मिक व देव स्थलों पर भी पूरे नौ दिन अनुष्ठानों के चलते मंत्रों की गूंज रहेगी। गोलापुरा स्थित गोंसाई मंदिर में 108 पाठकर्ता रामचरित मानस अथवा सुंदरकांड का पाठ करेंगे। वहीं अंतिम दिन यानि रावनवमीं के मौके पर विशाल हवन-पूजन के माध्यम से हवन वेदी में लाखों आहुतियां छोड़ी जाएगी।

 

मूर्ति निर्माण में पर्यावरण का खास ध्यान

           

इधर, मुख्यालय समेत अन्य स्थानों पर कुशल मूर्तिकार मॉ दुर्गा की प्रतिमाओं को मूर्तरूप देने में जुटे हैं। इसी बीच शहर के खेड़ीपुरा में रहने वाले बघेले मूर्तिकार दर्जनभर से अधिक प्रतिमाएं बनाई हैं। खास बात यह कि करीब 4 दशक से प्रतिमा निर्माण का कार्य कर रहा बघेले परिवार इन सबके बीच पर्यावरण का विशेष ख्याल रखते हैं। इसके लिये उपयुक्त मिट्टी तथा रद्दी पेपर का इस्तेमाल करते हैं, ताकि मूर्ति विसर्जित करते समय वह पानी में घुल जाएं और पर्यावरण को कतई नुकसान ना पहुंचे। चर्चा दौरान श्री बघेले ने बताया कि परिवार को ये कला पिता घासीराम बघेले से मिली। करीब 44 साल से मूर्ति बना रहा हूॅ , वहीं कई सालों से धर्मपत्नी का भी इस कार्य में सहयोग मिलता रहा है। उन्होंनें यह भी बताया कि पुस्तैनी सेवाकार्य के चलते हर साल मूर्ति बनाने के लिये गुजरात के पोरबंदर स्थित खड़िया से मिट्टी बुलाते हैं। जिसे पूरी तरह दुरूस्त करने के साथ ही उसमें रद्दी पेपर मिलाए जाते हैं। इस घोल से तैयार होने वाली मूर्ति से पर्यावरण को किसी तरह का नुकसान नही पहुंचता है। इन्हीं स्वच्छ मंशाओं के मध्य इस साल 14 देवी प्रतिमाओं को फाइनल टच दिया जा रहा है।

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