अनदेखी… सिविल लाइन क्षेत्र में हादसे का सिग्नल

WhatsApp Image 2025-09-19 at 11.24.35 PM

करीब 6 साल पहले राजधानी भोपाल में पानी की टंकी ढ़ह जाने के मामले में जहां नगरीय प्रशासन विभाग तुरंत हरकत में आ गया था। वहीं घटना को लेकर उच्च स्तरीय जांच के आदेश तथा प्रदेश के समस्त नगरीय क्षेत्रों में एहतियातन ऐसे निर्माण कार्यो को चिन्हित कर उसे डिस्मेंटल करने की कार्रवाई के लिये पाबंद किया था। साथ ही ऐसे स्थल के नीचे निवासरत अधिकारियों-कर्मचारियों को दूसरी जगह शिफ्ट करने की बात पर जोर दिया था। जिसका असर हरदा में भी देखने को मिला था। लेकिन कुछ समय बाद मामला ठंडा पड़ गया। परिणामस्वरूप उक्त समस्या अब खतरे का रूप ले चुकी है।

अनोखा तीर, हरदा। शहर के सिविल लाइन क्षेत्र में नगर पालिका स्वामित्व की टंकी परिसर में कई दशको पुराना जर्जर सिढ़ाओं अब भी हवा में झूल रहा है। इसे करीब से देखने पर खतरे की अनुभूति लाजमी है। यहां यह भी बता दें कि सफेद टंकी का पुराना सिढ़ाओं इस बारिश के सीजन में ओर ज्यादा कमजोर हो गया है। जिसकी पुष्टि सिढ़ाओं की सेहत को देखकर की जा सकता है। जगह-जगह से जर्जर इस सिढ़ाओं का ऊपरी हिस्सा हादसे का सिग्नल दे रहा है। क्योंकि, यहां सिढ़ाओं का मलबा ढहने की कगार पर है। टूटे-फूटे सिढ़ाओं पर लोहे के सरिये लहरा रहे हैं। मानो हर आते-जाते राहगिरों से गुहार लगा रहा है कि अब तो मुझे मुक्ति दे दो। उल्लेखनीय है कि करीब 6 से 7 साल पहले राजधानी भोपाल में पानी की टंकी क्षतिग्रस्त हो जाने के मामले में नगरीय प्रशासन विभाग ने सख्त रूख इख्तियार किया था। उस समय घटना को लेकर जहां उच्च स्तरीय जांच के आदेश हुए , वहीं प्रदेश के समस्त निगम, नगरीय एवं नगर परिषद क्षेत्रों में एहतियातन ऐसे निर्माण कार्यो को चिन्हित कर उसे अविलंब डिस्मेंटल करने का जिक्र किया था। साथ ही ऐसे स्थलों के नीचे निवासरत विभाग के अधिकारियों-कर्मचारियों को दूसरी जगह शिफ्ट करने के लिये पाबंद किया था। जिसका असर हरदा में भी देखने को मिला था। परंतु, उस समय समस्या से बचाव तो कर लिया, मगर उसे जड़ से खत्म नही कर पाएं और कार्रवाई ठंडे बस्ते में चली गई। परिणामस्वरूप समस्या एक बार फिर मुंह उठाये खड़ी है। हालांकि, जिम्मेदारों के समक्ष एक बार फिर ये मामला संज्ञान में लाने पर वे कार्रवाई का भरोसा दे रहे हैं।

बेअसर रही अफसरों की सक्रियता  

यहां बताना होगा कि जर्जर निर्माण को समय रहते डिस्मेंटल करने के निर्देशों के बाद तत्कालीन मुख्य नपा अधिकारी गजानंद नाफडे ने अधीनस्थ अधिकारियों के साथ उसी दिन सिविल लाइन स्थित पानी की टंकी परिसर का निरीक्षण किया था। यहां वर्षो अनुपयोगी सिढ़ाओं को नजदीक से देखा। वहीं सिढ़ाओं तोड़े जाने की बात पर मुहर लगाई थी। लेकिन कुछ समय बाद कार्रवाई ठंडे बस्ते में चली गई। उस समय चर्चा भी चली कि अफसरों की सक्रियता बेअसर साबित हुई।

कर्मचारियों को तुरंत किया शिफ्ट  

हालांकि, गरम-गरम माहौल में उक्त सिढ़ाओं के नीचे से कर्मचारियों को दूसरी जगह शिफ्ट करने की कार्रवाई की गई। साथ ही उस जगह कोई आए या जाए नही, इसलिये टीन लगाकर दोनों तरफ से पूरी तरह बंद कर दिया था। जानकारी के अनुसार सिविल लाइन स्थित पानी की टंकी के नीचे कुल 4 चार परिचार निवासरत थे। जिनमें से दो परिवारों को वहां से दूसरी जगह शिफ्ट होने की समझाइश दी। ऐसा इसलिये क्योंकि वे दो क्वार्टर सिढ़ाओं के ठीक नीचे थे। जहां कर्मचारियों का परिवार व बच्चे रहते थे।

इनका कहना है …

नया सिढ़ाओ बनने के बाद पुराना सिढाओ अगर बेवजह जर्जर हालत में बेवजह खड़ा है तो उसे हटाया जाएगा। मैं इस मामले को कल ही दिखवाता हूॅ।

कमलेश पाटीदार

मुख्य नपा अधिकारी, हरदा

Views Today: 2

Total Views: 72

Leave a Reply

error: Content is protected !!