पांच राज्यों में इस साल के अंत में चुनाव होने हैं, यहाँ की सरकारें जनता के लिए लोक लुभावन वादे कर रही हैं, घोषणाएं कर रही हैं, नई नई योजनायें लॉन्च कर रही हैं, मध्य प्रदेश और राजस्थान की सरकारों ने इन दिनों घोषणाओं की झड़ी लगा रखी है, लेकिन अब इसपर उन्हें जवाब देना होगा, सुप्रीम कोर्ट ने केंद्र सरकार, मप्र सरकार, राजस्थान सरकार और चुनाव आयोग को नोटिस जारी किया है।
सुप्रीम कोर्ट ने 4 सप्ताह में मांगा जवाब
विधानसभा चुनावों से पहले सरकारों की लोकलुभावन योजनाओं पर सुप्रीम कोर्ट में सख्ती दिखाई है। मतदाताओं को लालच देने वाली इस योजनाओं के खिलाफ दायर याचिका पर सुनवाई करते हुए सुप्रीम कोर्ट में केंद्र सरकार, मध्य प्रदेश सरकार, राजस्थान सरकार और चुनाव आयोग को नोटिस भेजा है और एक महीने में इसका जवाब मांगा है।
याचिकाकर्ता ने दी ये दलील
याचिकाकर्ता की दलील है कि सरकारें पांच साल काम नहीं करती और फिर चुनाव से ठीक पहले इन लोकलुभावन योजनाओं के जरिए वोटर्स को लालच देती हैं। सरकारें जनता के टैक्स का पैसा लुटाकर जनता से वोट बटोरने की कोशिश में रहती हैं जो अनुचित है। गौरतलब है जिन पांच राज्यों में चुनाव होने हैं वहां की मौजूदा सरकारों की कोशिश है कि आदर्श आचार संहिता लगने से पहले बड़ी घोषणाएं कर दी जाएं।
नई याचिका की सुनवाई पहले से चल रही याचिकाओं के साथ होगी
जनहित याचिका की सुनवाई चीफ जस्टिस डीवाई चंद्रचूड़ की अदालत में हुई , अदालत ने केंद्र सर्कार, राजस्थान सरकार, मध्य प्रदेश सरकार और चुनाव योग को नोटिस जारी कर 4 सप्ताह में जवाब मांगा है। सुप्रीम कोर्ट ने नई जनहित याचिका को पहले से चल रही अन्य याचिकाओं के साथ जोड़ दिया है। सभी मामलों की सुनवाई अब एक साथ होगी।
भाजपा नेता अश्विनी उपाध्याय ने लगाई है याचिका
गौरतलब है कि भाजपा नेता एवं सुप्रीम कोर्ट के वकील अश्विनी उपाध्याय फ्रीबीज के खिलाफ ने एक जनहित याचिका सुप्रीम कोर्ट में लगाई थी। याचिका में अश्विनी उपाध्याय ने चुनावों के दौरान राजनीतिक पार्टियों के वोटर्स से फ्रीबीज या मुफ्त उपहार के वादों पर रोक लगाने की अपील की है। याचिका में मांग की गई है कि चुनाव आयोग को ऐसी पार्टियां की मान्यता रद्द करनी चाहिए। इस याचिका पर सुनवाई जारी है अब नई याचिका भी इसी के साथ क्लब कर सुनी जाएगी।
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