अनोखा तीर, हरदा। सरस्वती विद्या मंदिर में विद्वत परिषद जिला हरदा के तत्वाधान में शैक्षिक अनुष्ठान वैचारिक संगोष्ठी का आयोजन किया गया। कार्यक्रम के मुख्यवक्ता शिरोमणी दुबे प्रादेशिक सचिव सरस्वती विद्या प्रतिष्ठान मध्यभारत प्रांत, प्रांतीय समिति सदस्य संदीप केकरे तथा विद्यालय समिति के सचिव आलोक जैन उपस्थित रहे। सर्वप्रथम वीणापाणि मां सरस्वती के समक्ष दीप प्रज्जवलन कर कार्यक्रम का शुभारंभ किया। अतिथि परिचय विद्यालय के प्राचार्य विनय कुमार शर्मा ने कराया। कार्यक्रम का संचालन प्रधानाचार्य राजेन्द्र तिवारी ने किया। व्यक्तिगत गीत निर्माणों के पावन युग में हम चरित्र निमार्ण न भूले के पश्चात मुख्य वक्ता श्री दुबे ने अपने विचार व्यक्त करते हुए राष्ट्रीय शिक्षा नीति 2020 के अनुरूप शिक्षा कैसी हो? शिक्षा के उद्देश्य की पूर्ति शिक्षक और विद्यालय में निर्माण की प्रक्रिया से ही संभव होता है। सभ्यता संस्कृति के ज्योतिपुंज को एक पीढी से दूसरी पीढी में हस्तांतरित करना अत्यंत आवश्यक है, समाज की इकाई परिवार, विद्यालय है। समाज और राष्ट्र के निर्माण में विद्यालय शिक्षक और विद्यार्थी की त्रिवेणी की सजगता, सर्तकता से ही संभव है। शिक्षक किसी विषय अथवा विद्यालय का नहीं वरन संपूर्ण समाज का शिक्षक होता है राष्ट्र निर्माण में शिक्षक की महती भूमिका है। शिशु शिक्षा से समाज के निर्माण की प्रक्रिया प्रारंभ हो जाती है। अत: राष्ट्रीय शिक्षा नीति 2020 के अनुरूप विद्याभारती के माध्यम से शिशु कक्षा में सर्वांगीण विकास की संकल्पना का साकार स्वरूप है। शिक्षक केवल विषय अथवा विद्यार्थियों का न होकर राष्ट्र का शिक्षक बनना आवश्यक है। विद्यार्थी तीन प्रकार से सीखता है देखकर, स्वयं प्रयोग करके, तथा अनुभव से सीखता है। शिक्षक प्रेरक हो सकता है, वातावरण निर्मित कर सकता है संसाधन की उपलब्धता करता है, शिक्षक की भूमिका मेंटर की होनी चाहिए। अत: अभिभावक, विद्यार्थी विद्यालय एवं शिक्षक के सहयोग से समाज निर्माण करते हुए राष्ट्र निर्माण करना आज की महती आवश्यकता है। इसमें हम सभी समविचारी विद्यालय अपनी सहभागिता सुनिश्चित करें। आभार प्रदर्शन के पश्चात वंदे मातरम से कार्यक्रम का समापन हुआ।


