सोयाबीन को जीवन देने खेत में छोड़ा पानी

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अनोखा तीर, हरदा। मौसम की बेरूखी के चलते किसानों को खेतों में पानी छोड़ने का फैसला लेना पड़ा। आग उगलती गर्मी के बीच फसलों में दिनरात पानी चल रहा है। जिसने सोयाबीन को ताकत देने का काम किया है, ताकि खेत में नमी के अभाव में फसल दम तोड़ने ना लगे। प्राप्त जानकारी के अनुसार क्षेत्र में बारिश अचानक गायब हो गई है। करीब 20 दिनों से यहां पानी नही बरसा है। जिसके चलते क्षेत्र के किसान चिंतित हैं। क्योंकि प्रत्येक किसान के खेत में निजी जल स्त्रोत नही हैं। ऐसे में केवल प्रार्थना करना ही उनके हाथ है। मौसम के कारण निर्मित इन हालातों के बीच कृषि विभाग का निरीक्षण दल गांव-गांव भ्रमण कर रहा है। इस दौरान किसानों की फसलों को करीब से देखने के साथ ही उन्हें उचित मार्गदर्शन दिया जा रहा है। दल शुक्रवार को कडोला उबारी और मसनगांव होते हुए ग्राम कमताड़ा पहुंचा। जहां फसलों का निरीक्षण करने के साथ ही किसानों से चर्चा भी की। यहां से कृषि दल खिरकिया ब्लाक के ग्राम रामपुरा, आमासेल, दीपगांवकला, चारूवा, सोनपुरा, मक्तापुर, छीपावड़, मुहालकला और मांदला आदि समेत अन्य ग्रामो में पहुंचा। दल में उपसंचालक कृषि एमपीएस चन्द्रावत, वरिष्ठ कृषि विकास अधिकारी संजय जैन एवं क्षेत्रीय ग्रामीण कृषि विस्तार अधिकारी दीपक कुमार रिछारिया शामिल थे।

 

 टेम्पोरेरी विल्टिंग की अवस्था  

प्राप्त जानकारी के अनुसार कृषि विभाग के निरीक्षण दल ने शुक्रवार को कुछ खेतों में पाया कि फसल में कहीं-कहीं टेम्पोरेरी विल्टिंग की अवस्था देखने को मिली है। संबंधित किसानों को समझाया कि टेम्पोरेरी विल्टिंग में पौधे अपनी पत्तियों को इस तरह से झुका लेता है कि वाष्पोत्सर्जन की दर न्यूनतम हो जाए। ऐसा पौधा दीर्घकाल तक बने रहने की दृष्टि से नमी को संरक्षित करता है।

 

दल ने माना ! पानी की दरकार

बीतें कई दिनों से गांव-गांव भ्रमण कर रहे दल को अब खेतों में यह अहसास होने लगा है कि फसल को पानी की दरकार है। हालांकि भारी जमीनों में फिलहाल हालात कंट्रोल में हैं। इसके अलावा खेत में लगी फसलों की स्थिति संतोषप्रद है। कीट व्याधि का प्रकोप आर्थिक हानि स्तर से नीचे है। बावजूद, फसलों को आगामी एक सप्ताह में पानी की प्यास बढ़ने लगेगी।

उधर, सूखाग्रस्त घोषित करने की उठी मांग

जिले में खरीफ सीजन में बोई गई फसलों पर चिंता के बादल छाये हुए हैं। क्षेत्र के किसान हालातों को भांपकर उसके पटरी पर लाने में जुटे हुए हैं। इन सबके बीच किसान कांग्रेस ने कलेक्टर को एक पत्र लिखकर जिले को सूखाग्रस्त घोषित कर प्रभावित किसानों को राहत मुहैया कराने की मांग उठाई है। किसान कांग्रेस जिलाध्यक्ष मोहन सांई ने अपने पत्र में कहा कि इस साल कम बारिश के कारण ये हालात बने हैं। ऐसे वक्त पर किसानों को मदद प्रदान करने की जरूरत है। यह भी उल्लेख किया कि विगत दिनों किसानों के हितार्थ पहर में पानी छोड़ने तथा गांवों में 24 घंटे बिजली उपलब्ध कराने की बात पर जोर दिया था, ताकि स्थिति पर काबू पाया जा सके।

एक नजर में आंकडे

फसल का नाम — रकबा

सोयाबीन — 174500 हेक्टयर

मक्का — 12000 हेक्टयर

उड़द — 1500 हेक्टयर

धान — 2500 हेक्टयर

मूंग — 500 हेक्टयर

अरहर — 250 हेक्टयर

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