बागली विधानसभा – ग्राउंड रिपोर्ट, भाजपा के कई लोगों ने संजोए टिकट के सपने, कांग्रेस में भी कई दावेदार

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पवन उपाध्याय

अधिमान्य पत्रकार मध्य प्रदेश शासन

देवास जिले की बागली विधानसभा यूं तो भाजपा का गढ़ माना जाता है लेकिन इस कांग्रेस भी पूरे दम खम से जिताऊ उम्मीदवार को मैदान में उतारने मैं कसर नहीं छोड़ेगी

 

बागली – बागली विधानसभा सीट जो की परंपरागत भारतीय जनता पार्टी की सीट जहां पर मात्र एक बार कांग्रेस के स्वर्गीय श्याम होलानी ने विजय पाई थी इस सीट का सन 2008 के पहले सामान्य सीट हुआ करती थी जिस पर राजनीति के संत कहलाने वाले पूर्व मुख्यमंत्री स्वर्गीय कैलाश जोशी ने 8 बार जीत हासिल की एक बार उनके बेटे पूर्व मंत्री दीपक जोशी ने जीत हासिल की फिर यह सीट 2008 में आजा के लिए आरक्षित हो गई जिस पर दो बार स्वर्गीय चंपालाल देवड़ा विधायक रहे उनके स्थान पर 2018 के चुनाव में भाजपा ने देवड़ा की टिकट काटकर डीएसपी पद से इस्तीफा देकर आए वर्तमान विधायक पहाड़ सिंह कन्नोजे को टिकट दिया और वह मात्र 36 दिनों के राजनीतिक जीवन में विधायक बने। क्योंकि यह सीट परंपरागत भाजपा की सीट कहलाती है और इस सीट पर कांग्रेस को जीत हासिल करना एक दिव्यस्वप्न की तरह है इस सीट पर भिलाला बारेला भील समुदाय के लगभग 40000 हजार वोट है वही कोरकू समाज के लगभग 45 से 50000 वोट वही गोंड आदिवासी समाज से तकरीबन 15000 वोट हैं इस सीट पर जातिगत समीकरण भी प्रभाव सील रहता है जहां पूर्व के विधायक चंपालाल देवड़ा कोरकू आदिवासी समाज से आते थे वही वर्तमान विधायक पहाड़ सिंह कनौजे भिलाला समाज से आते हैं।

कांग्रेस से टिकट के दावेदार

कांग्रेस ने पूर्व में दो बार कमल वास्केल एवं एक बार तेरसिंह देवड़ा उम्मीदवार बनाया जिन्हें हार मिली कांग्रेस का अंतर्द्वंद इस सीट पर हमेशा रहती है यही कारण है कि कांग्रेस को पराजय देखने को मिलती है विगत कई वर्षों से यहां पर कोरकू आदिवासी समाज से एवं भिलाला समाज से कई नौकरी पेशा वर्ग के लोग सामाजिक रुप से सक्रिय हैं जो कहीं ना कहीं दोनों दलों से टिकट की चाहत रखते हैं कांग्रेश से एक और जहां कमल वास्कले पुनः दावेदारी कर रहे हैं वही नंदू सिंह रावत भी दावेदारी कर रहे हैं यह दोनों भिलाला समुदाय से आते हैं वही गोपाल भोसले जोकि विगत 15 वर्षों से बागली विधानसभा में जोर आजमाइश कर रहे हैं सामाजिक कार्यक्रमों में आना जाना नित्य करते हैं वही लोगो का कहना है कि पिछली बार कांग्रेस इनको टिकट देती तो शायद ये विधायक बन जाते वही जनपद अध्यक्ष बागली नाहरसिंह मुजाल्दे भी यहां से दावेदारी कर रहे हे वही वर्तमान में जिला पंचायत के सदस्य का चुनाव जिले में सर्वाधिक मतों से जीतने का रिकॉर्ड बनाने वाले पूर्व मंडी अध्यक्ष कन्नौद मांगीलाल कप्तान के सुपुत्र रमन कलम हथनोरी भी प्रबल दावेदार है यहां गोपाल भोसले और रमन कप्तान कोरकू समाज से आते हैं वही बागली विधानसभा का जो एक हिस्सा घाटों पर कहलाता है जहां से कांग्रेस रिकॉर्ड मतों से हारती है वहां से लगातार दो बार जिला पंचायत सदस्य एडवोकेट कमल मर्सकोले प्रबल दावेदार हैं

भाजपा से टिकट के दावेदार

दूसरी ओर भाजपा के वर्तमान विधायक पहाड़ सिंह कनौजे के साथ ही भारतीय जनता पार्टी में भी दावेदारों की पेरित लंबी हो गई है एक दर्जन से ज्यादा दावेदार भारतीय जनता पार्टी में उभर कर आए हैं दिन में प्रमुख रूप से मध्य प्रदेश आदिवासी वित्त विकास निगम के अध्यक्ष श्रीमती निर्मला बारेला के पति सुनील बारेला का जोकि मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चौहान के बेहद करीबी होते हैं वही वह बारेला समाज से आते हैं विगत कई वर्षों से क्षेत्र में उनकी सक्रियता जारी है उनकी मुख्यमंत्री से निकटता हैं इधर संघ की ओर से प्रमुख दावेदार मुरली भंवरा ठाकुर भी संगठन की पसंद हो सकते हे तथा हरिओम कर्मा खुशीलाल राठौर आदि लोग अपनी दावेदारी कर रहे हैं इन नाम के अलावा कई लोग टिकट के लिए भोपाल तक चक्कर लगा रहे हैं देखना यह है कि आने वाले समय में यह सीट का ताज किस के सिर जाता है बागली विधानसभा का टिकट किसे भी मिले वर्तमान में दोनों दल मजबूती से यह दावा नहीं कर सकते कि इस बार कौन जीतेगा यदि कांग्रेस में परंपरागत गुटबाजी यदि हावी नहीं रही तो जीत कांग्रेस के खाते में भी जा सकती है भाजपा इस सीट को परंपरागत सीट मानती है यही कारण है कि भाजपा के वरिष्ठ नेता इस सीट पर ज्यादा ध्यान नहीं देते दूसरी ओर पुराने भाजपा के दिग्गज नेता जहां स्वर्गीय कैलाश जोशी को बहुत मान सम्मान देते थे और उनके उनके एक इशारे पर यह सीट जिताकर भाजपा की झोली में डालते थे परंतु वर्तमान में उनके पुत्र दीपक जोशी पूर्व मंत्री के वर्तमान में कांग्रेस में चले जाने से यहां भाजपा में लिए चुनौती बन गई है विधायक पहाड़ सिंह कनौजे के सामने मुख्यमंत्री के खास निर्मला सुनील बरेला, संघ परस्तभूमि के मुरली भांवरा जहा दमदारी से विभिन्न कार्यक्रमो के माध्यम से कार्यकर्ता की भीड़ जुटा कर अपनी दावेदारी प्रस्तुत कर रहे हे वही कांग्रेस पार्टी मैदान में जिताऊ उम्मीदवार उतरती से तो भाजपा के लिए परेशानी का सबब बन जायेगा।

बागली जिला बनाने को लेकर चल रहा है आंदोलन

मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चौहान द्वारा तीन बार बागली को जिला बताने की घोषणा की जा चुकी है लेकिन अभी तक इसे जिला नहीं बनाया गया जिस कारण बागली में लोग आंदोलन भी कर रहे हैं जिसे कहीं ना कहीं भाजपा को नुकसान उठाना पड़ सकता है

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