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Tuesday, 13 October 2026
हरदा

मजदूर दिवस आज…. ग्राम पंचायतों में मजदूरों का काम मांगो अभियान  

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आज 1 मई मजदूर दिवस है। इस दिन जगह-जगह मजदूर संगठनों समेत अन्य समाजसेवी संस्थाएं मजदूरों का सम्मान तथा व्यवस्था अंतर्गत उनकी भूमिका पर अपनी बात रखेंगे। साथ ही मजदूरों के हितार्थ अपनी आवाज बुलंद करने वाले शख्स तथा सक्रिय पदाधिकारियों की हौंसला अफजाई की जाएगी। वहीं दूसरी ओर इस दिन पंचायती राज संगठन के आह्वान पर प्रदेश के विभिन्न जिलों की ग्राम पंचायतों में मजदूर काम मांगों अभियान छेडेंगे। इस मौके पर मजदूर पंचायत के जिम्मेदारों को फार्म 6 सौंपेंगे।  

 

अनोखा तीर, हरदा। प्रतिवर्ष अनुसार सोमवार 1 मई को मजदूर दिवस मनाया जाएगा। इस दिन श्रमिक संगठनों के साथ-साथ मजदूर संघ एवं समाजसेवी संस्थाएं मजदूरों की भूमिका पर अपने विचार व्यक्त करने के साथ ही उनका सम्मान भी करेंगे। इसी दिन राजीव गांधी पंचायती राज संगठन के आह्वान पर मजदूर काम मांगो अभियान छेंछेंगे। जिसके तहत सरंपच-चिव सहित अन्य जिम्मेदारों से मनरेगा अंतर्गमत काम की मांग की जाएगी। इसके लिये मजदूरों को अनुबंध – 6 फार्म उपलब्ध कराएं हैं। जिन्हें मजदूर संबंधितों के समक्ष भरेंगे। अभियान को लेकर संगठन के प्रदेश अध्यक्ष हेमंत टाले ने बताया कि प्रदेश स्तरीय अभियान अंतर्गत विभिन्न जिलों में यह अभियान चलाया जाएगा। इसके लिये संगठन के जिलाध्यक्षों सहित अन्य पदाधिकारियों को जिम्मेदारी सौंपी है। वहीं एक दिन पहले यानि रविवार को हरदा एवं खिरकिया ब्लाक के कई ग्रामों में जाकर वहा रहने वाले मजदूरों से रूबरू हुये। राजीव गांधी पंचायती राज संगठन के पदाधिकारी क्षेत्र के ग्राम बीड़, पलासनेर करणपुरा और हनीफाबाद में मजदूरों के बीच पहुंचे। मजदूरों से मनरेगा तथा उसके तहत मिलने वाले काम को लेकर बातचीत की। साथ ही 1 मई को मजदूर दिवस के मौके पर अपने हक-अधिकार के रक्षार्थ काम मांगो अभियान में हिस्सा लेने की अपील की।

फार्म का महत्व….

राजीव गांधी पंचायती राज संगठन के मुताबिक मनरेगा योजना में अनुबंध 6 फार्म का खासा महत्व है। इस फार्म को भरने के बाद निर्धारित समयावधि में मजदूरों को काम मुहैया कराना होता है, अन्यथा संबंधित मजदूर बेरोजगारी भत्ता के पात्र होते हैं। क्योंकि मनरेगा योजना मजदूरों के हितार्थ एक कानून है। जिसके तहत ग्राम पंचायत मजदूरों को काम मुहैया कराने की जबावदेह हैं, ताकि गरीब मजदूरों का परिवार अपना गांव अपना घर छोड़कर पलायन करने को विवश ना हों। गांव में ही मजदूर परिवार के भरण पोषण का इंतजाम हो, इन सब बातों को ध्यान में रखकर यह कानून बना है।

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