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Tuesday, 13 October 2026
हरदा

तालमेल की कमी … निर्माण कार्य का ले-आउट डालते ही उठा सवाल

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 मुख्यालय पर प्रस्तावित अनुविभागीय अधिकारी राजस्व के नवीन कार्यालय के निर्माण कार्य को लेकर हाल ही डाला गया ले-आउट सवालों के घेरे में है। इस संबंध में कार्यपालन यंत्री जल संसाधन विभाग ने संभागीय अधीक्षण यंत्री लोक निर्माण विभाग पीआईयू को पत्र लिखा है। वहीं पत्र के माध्यम से भूमि हस्तांतरण एवं निर्माण की अनुमति से अवगत कराने की बात कही है।  

 

अनोखा तीर, हरदा। अक्सर देखने में आएगा कि सरकारी निर्माण कार्य दौरान विभागों के बीच आपसी तालमेल की कमी के चलते कई बार मामला नियमों के दांव पेंच में उलझने लगता है। कई बार कार्यो को कुछ ऐसी टल लग जाती है कि सालों गुजर जाते हैं। ऐसे समय पर वरिष्ठ कार्यालय यानि आला अधिकारी तथा क्षेत्रीय जनप्रतिनिधियों का हस्तक्षेत्र लाजमी है। शासकीय जिला अस्पताल परिसर में १७ करोड़ की लागत से निर्माणाधीन १०० बिस्तरीय अस्पताल का काम शुरू होने से पहले यहां भी खींचतान देखने को मिली थी। ऐसा ही एक ओर मामला प्रकाश में आया है। जब, जल संसाधन विभाग की खाली जगह पर भवन निर्माण के लिये चूने से डाला गया ले-आउट सवालों के घेरे में है। जो यह दर्शाता है कि सरकारी निर्माण कार्य दौरान कहीं ना कहीं विभागों के बीच आपसी तालमेल की कमी है। जानकारी के अनुसार हाल ही में प्रदेश के विभिन्न जिला एवं तहसील मुख्यालयों पर नवीन अनुविभागीय अधिकारी कार्यालयों के निर्माण कार्य को गति मिली है। इसी क्रम में जिला मुख्यालय पर नवीन तहसील कार्यालय के पास निर्माण का ले आउट डाला गया है। यह खबर जल संसाधन विभाग को 24 अप्रैल को पता चली। जिसके बाद यह मामला पत्राचार तक पहुंच गया है। इस संबंध में कार्यपालन यंत्री जल संसाधसन विभाग डीके सिंह ने लोक निर्माण विभाग के संभागीय अधीक्षण यंत्री को पत्र लिखा है। उन्होंनें कहा कि जल संसाधन विभाग की तवा कालोनी में जिस जगह पर ले-आउड डाला है, वहां कालोनी के आवासीय परिवारों के बच्चों के खेलने के लिए पार्क बनना है। परंतु उस जगह पर किसी अन्य निर्माण कार्य का ले आउट डाला गया है । जबकि उक्त निर्माण कार्य के प्रस्तावित क्षेत्र का हस्तांतरण एवं निर्माण की अनुमति नगण्य है। श्री सिंह ने हस्तांतरण एवं अनुमति से अवगत कराने की बात कही है, ताकि नियमानुसार भूमि हस्तांतरण की जानकारी वरिष्ठ कार्यालय को दी जा सके। उन्होंनें लोक निर्माण विभाग को लिखे पत्र की एक प्रतिलिपि अधीक्षण यंत्री तवा परियोजना मंडल नर्मदापुरम तथा दूसरी प्रतिलिपि अनुविभागीय अधिकारी राजस्व की ओर प्रेषित की है। ऐसी स्थिति में अब सवाल उठता है कि जगह चिन्हित करने से पहले संबंधित विभाग से बातचीत हुई या नही ? सरकारी निर्माण कार्य से पूर्व सभी प्रक्रियाएं पूर्ण हो चुकी या प्रक्रियाधीन है ? निर्माण कार्य प्रारंभ होने वाला है या फिलहाल थोड़ा वक्त लगेगा ? जैसे कई सवाल उठते हैं। क्योंकि हस्तांतरण एवं अनुमति के अभाव में निर्माण कार्य का पहला कदम उठना स्वत: विचारणीय है।

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