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Friday, 23 October 2026
हरदा

कल छूटेगा पानी, तैयारी में जुटे किसान

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अनोखा तीर, हरदा। जिला जल उपयोगिता समिति की बैठक में किसान प्रतिनिधियों की मौजूदगी में तय कार्यक्रम अनुसार ग्रीष्मकालीन मूंग की सिंचाईं के लिये कल यानि शनिवार 25 मार्च को नहर में पानी छूटेगा, जो दूसरे दिन रविवार शाम को जिले में प्रेवश करेगा। इससे पहले सिंचाईं के लिए चिन्हित किए गए ग्रामों में किसान तैयारियों में जुट गया है। एक तरफ जहां कटाई कार्य ने रफ्तार पकड़ ली है। वहीं दिनरात खेतों में ट्रेक्टर दौड़ रहे हैं, ताकि 25-26 मार्च तक सभी कार्यो से निवृत्त हो सकें। बता दें कि विगत दिनों क्षेत्र में हल्की बूंदाबांदी तथा रहटगांव क्षेत्र में ओलावृष्टि के कारण सारे किसानी समीकरण बदले-बदले दिखाई दे रहे हैं। इधर, इस साल ग्रीष्मकालीन मूंग की बुआई के लिए जारी कमांड क्षेत्र पर भारतीय किसान संघ के जिला जल संसाधन प्रभारी दीपचंद नवाद ने अपनी प्रतिक्रिया दी है। उन्होंनें जारी बयान में कहा कि पिछले साल की तुलना इस साल तवा डेम का लेवल 2 फीट अधिक है। बावजूद इस बार २३४० हेक्टेयर रकबा कम कर दिया, जो कि विचारणीय है। उन्होंनें यह भी कहा कि मूंग कमांड क्षेत्र अंतर्गत आने वाले प्रत्येक किसान तक पर्याप्त पानी पहुंचाएं जाए। इसके लिए जरूरी है कि जिले को उसके हक का पूरा 2200 क्यूसेक पानी छोड़ा जाए। इस संबंध में भाकिसं ने प्रशासन के समक्ष अपनी बात रखी है। साथ ही सुधार कार्य के नाम पर माचक उपनहर को मूंग फसल के लिए बंद रखने के फैसले पर कड़ी आपत्ति जताई है। वहीं माचक नहर का कमांड एरिया घोषित करने की मांग की है।

गेज एवं एफएसएल लेवल जरूरी

किसान प्रतिनिधियों के मुताबिक पारदर्शी जल वितरण व्यवस्था के लिए सबसे जरूरी है कि मुख्य जल वितरण बिंदु 3008 से निरंतर 2200 क्यूसेक पानी जिले को मिलता रहे। साथ ही तवा डेम से लेकर टेल एरिया तक की तमाम नहरों पर गेज एवं एफएसएल लेवल अंकित करने की बात पर जोर दिया है।

इधर, बीज की कीमत में उछाल

तीसरी या यूं कहें कि अतिरिक्त मूंग की फसल किसानों के लिए फायदे का प्रयास है। यही वजह है कि साल दर साल मूंग का रकबा बढ़ रहा है। वहीं प्रदेश सरकार भी सिंचाई के लिए हरसंभव मदद उपलब्ध करा रही है। इन सबके बीच बीज विक्रेता मौके का फायदा उठाने से नही चूक रहे हैं। दरअसल, बुआई का काम रफ्तार पकड़ते ही मूंग के बीज में उछाल आ गया है। जो बीच एक-दो दिन पहले 110 रूपए किलो मिल रहा था, वही 130 हो गया है। इस तरह मूंग की सभी किस्में 20 से 30 रूपए किलो महंगी हो गई है। जिसका सीधा असर किसानों की जेब पर पड़ेगा।

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