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Hindi NewsLocalMpBhopalGunaSupply Only 4 5 Hours In Rural Areas, 8 9 Hours In Towns; Vegetable Growers In Distress; Electricity Department Raised Handsगुना18 मिनट पहलेकॉपी लिंकप्रतीकात्मक फोटो।जिले में भीषण बिजली संकट गहरा गया है। घंटों तक अघोषित बिजली कटौती की जा रही है। ग्रामीण इलाकों में तो हालात और भी ज्यादा खराब हो गए हैं। कई जगह तो महज 3-4 घंटे ही बिजली दी जा रही है। इससे गर्मी वाली फसलों और सब्जियों में पानी देना मुश्किल होता जा रहा है। उधर, विद्युत विभाग ने भी अपने हाथ खड़े कर दिए हैं। उनका कहना है कि ऊपर से ही बिजली कम मिल रही है। इसी वजह से ज्यादा सप्लाई नहीं हो पा रही है।सरकार का लगातार दावा रहा है कि शहरों में 24 घंटे और ग्रामीण इलाकों में कम से कम 8 घंटे बिजली दी जा रही है। लेकिन वास्तविक धरातल पर स्थिति इसके बिल्कुल विपरीत हो गयी है। गर्मियां आते ही अघोषित बिजली कटौती का दौर शुरू हो गया है। हालात यह हैं कि कब बिजली आएगी और कब काट ली जाएगी, इसका कोई समय भी तय नहीं है। इससे नागरिकों में भी असमंजस की स्थिति बन गयी है। समय तय न होने से उन्हें भी परेशानी का सामना करना पड़ता है। बिजली कंपनी द्वारा कटौती की सूचना भी नहीं दी जाती है।कस्बों में 10 घंटे तक कटौतीम्याना कस्बे के रहने वाले अभय व्यास बताते हैं कि पिछले 10-15 दिनों से अघोषित बिजली कटौती जारी है। लगभग 10-12 घंटे की कटौती की जा रही है। हालात यह हैं कि 12 बजे बिजली आती है और 1 बजे काट ली जाती है। कटौती का कोई समय भी तय नहीं है। रातें बिना बिजली के गुजर रही हैं। इसी तरह आरोन, मधुसूदनगढ़, बमोरी, कुंभराज सहित अन्य कस्बों के यही हालत हैं।आदिवासी इलाकों में हालात खराबग्रामीण इलाकों में तो हालात और भी खराब हो गए हैं। महज 4-5 घंटे ही बिजली दी जा रही है। बमोरी के आदिवासी इलाकों में स्थित खराब है। सिंहपुर, छपरा, खिरिया, अगरा सहित अन्य गांव में तो 2-3 घंटे ही बिजली दी जाती है। बिजकी कब आएगी, कितनी देर के लिए आएगी, यह भी तय नहीं है। ऐसे में वहां पेयजल का संकट भी गहरा गया है। जैसे ही बिजली आती है, ग्रामीण पानी के लिए कतारें लगाने में लग जाते हैं।सब्जी के लिए संकटअघोषित बिजली कटौती से सब्जी की फसलों पर भी प्रभाव पड़ा है। इस समय सब्जी के खेतों में सिंचाई होनी है, लेकिन पर्याप्त बिजली न मिलने से सिंचाई में परेशानी आ रही है। बिजली आती भी है तो सबसे पहले लोग अपनी जरूरत के लिए पानी भरते हैं, इतने में ही बिजली काट ली जाती है। पर्याप्त सिंचाई न होने से आने वाले समय में सब्जी के उत्पादन में कमी आ सकती है।विद्युत विभाग ने खड़े किए हाथविद्युत विभाग के SE एसपी शर्मा का कहना है कि ऊपर से ही बिजली कम मिल रही है। डैम में पानी कम हो गया है। वहीं कोयले का भी क्राइसिस है। इससे बिजली का उत्पादन ही कम हो गया है। ऊपर से जैसे हमे निर्देश मिल रहे हैं, उस हिसाब से काम कर रहे हैं। कोशिश की जा रही है कि ज्यादा बिजली दी जाए। पिछले वर्ष के मुकाबले अप्रैल महीने में जस वर्ष ह्यदा बिजली दी है, उसके बावजूद भी कमी है। हर महीने 35 लाख यूनिट बिजली जिले में दी जा रही है। गर्मी में मांग और बढ़ेगी। हालांकि, कुछ दिन में संकट दूर हो जाएगा, ऐसा वरिष्ठ अधिकारियों का मानना है।खबरें और भी हैं…
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