प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्र में नहीं मिल रही सुविधा

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-गंभीर मरीजों को ले जाना पड़ रहा जिला अस्पताल
अनोखा तीर, मसनगांव। नवीन प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्र में सुविधाओं के अभाव के कारण गंभीर रूप से बीमार मरीजों को जिला अस्पताल या निजी अस्पताल ले जाना पड़ रहा है। ग्राम में शासन द्वारा स्वास्थ्य सुविधाओं के विस्तार के लिए डेढ़ करोड़ की लागत से नया प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्र बनाया गया है, जिसमें सभी सुविधाओं के लिए कक्षों का निर्माण किया गया है, परंतु करोड़ों रुपए की लागत से बना यह भवन केवल शोपीस बनकर रह गया है। यहां स्टाफ के अभाव के कारण मरीजों को स्वास्थ्य सेवाएं नहीं मिल पा रही हैं। पर्याप्त स्टाफ नहीं होने से मरीजों को इलाज के लिए हरदा या अन्य स्थानों पर जाना मजबूरी बन गया है। प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्र में एलोपैथिक चिकित्सक के रूप में डॉ. अखिल बिश्नोई तथा आयुष चिकित्सक के रूप में मनीष गौर सेवाएं दे रहे हैं। यहां पदस्थ स्टाफ नर्स को छुट्टी पर गए तीन माह हो चुके हैं, पर उनकी जगह अन्य स्टाफ की नियुक्ति नहीं होने से समस्या बनी हुई है। एक समय में स्वास्थ्य केंद्र में 35 से 40 मरीज रोजाना पहुंचते थे, वहीं नए भवन में केंद्र स्थानांतरित होने के बाद पर्याप्त स्टाफ न होने से ग्रामीणों को इसका लाभ नहीं मिल रहा है। भवन के अनुसार यहां नर्सिंग स्टाफ की आवश्यकता बनी हुई है। स्वास्थ्य केंद्र में एएनएम, फार्मासिस्ट, लैब टेक्नीशियन, कंपाउंडर, वार्ड बॉय तथा महिला चिकित्सक की जरूरत है।
भवन के हिसाब से नहीं है सुविधा
ग्राम में बनाए गए नए प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्र में मरीजों को भर्ती करने की सुविधा दी गई है, लेकिन इमरजेंसी की स्थिति में ऑक्सीजन की सुविधा नहीं होने से मरीजों को भर्ती करना संभव नहीं हो पाता। वहीं लैब टेक्नीशियन की कमी के कारण रक्त जांच की सुविधा भी उपलब्ध नहीं है। ऐसे में गंभीर मरीजों को जिला अस्पताल ले जाकर इलाज कराना पड़ रहा है। यदि प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्र में सभी सुविधाएं व्यवस्थित रूप से उपलब्ध हों, तो आसपास के 10 गांवों के मरीजों को इसका लाभ मिल सकता है। इसके लिए स्थायी रूप से एएनएम, महिला चिकित्सक और स्टाफ नर्स की नियुक्ति आवश्यक है, जिससे ग्रामीण क्षेत्र की महिलाओं को प्रसूति जैसी सेवाएं स्थानीय स्तर पर ही मिल सकें। ग्रामीणों द्वारा वर्तमान में सर्दी, जुकाम, बुखार, शुगर, बीपी और खांसी जैसी सामान्य बीमारियों के लिए ही स्वास्थ्य केंद्र में उपचार कराया जा रहा है। यहां एलोपैथी के साथ आयुर्वेदिक चिकित्सक की उपलब्धता से कुछ मरीजों को लाभ मिल रहा है, लेकिन गंभीर मरीजों को जिला अस्पताल या निजी चिकित्सकों के पास जाना पड़ रहा है। पूर्व में स्वास्थ्य विभाग के सीएमएचओ डॉक्टर एचपी सिंह ने बताया था कि स्वास्थ्य केंद्र में कंपाउंडर और नर्स की व्यवस्था के लिए शासन को पत्र लिखा गया है, लेकिन अब तक व्यवस्था नहीं हो पाई है। वर्तमान में दो चिकित्सक ही पूरी व्यवस्था संभाल रहे हैं। यहां तक कि झाड़ू-पोछा के लिए भी स्वीपर की व्यवस्था नहीं है, जिससे साफ-सफाई प्रभावित हो रही है। भवन के अनुरूप पर्याप्त स्टाफ और सुविधाएं उपलब्ध नहीं होने से यह प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्र केवल दिखावा बनकर रह गया है।

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