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Saturday, 17 October 2026
हरदा

ई-कॉमर्स की मनमानी पर लगे रोक, राष्ट्रीय रिटेल परिषद के गठन की मांग

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अनोखा तीर, हरदा। कॉन्फेडरेशन ऑफ ऑल इंडिया ट्रेडर्स के जिला अध्यक्ष सरगम जैन ने कैट के राष्ट्रीय महामंत्री एवं दिल्ली सांसद प्रवीन खंडेलवाल के हवाले से बताया कि सरकार से ई-कॉमर्स और क्विक कॉमर्स कंपनियों की बढ़ती मनमानी तथा अनुचित व्यापारिक प्रथाओं पर तत्काल और कठोर कार्रवाई करने की मांग की गई है। कैट ने संसद द्वारा पारित जन विश्वास विधेयक 2.0 का स्वागत करते हुए कहा कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के नेतृत्व में यह कदम विश्वास-आधारित शासन और व्यापार सुगमता को मजबूत करने की दिशा में एक महत्वपूर्ण पहल है। इससे देश के व्यापारियों और उद्यमियों में विश्वास बढ़ेगा तथा सकारात्मक कारोबारी माहौल तैयार होगा। कैट के राष्ट्रीय महासचिव प्रवीण खंडेलवाल ने चिंता व्यक्त करते हुए कहा कि कुछ विदेशी पूंजी से संचालित ई-कॉमर्स कंपनियां भारत के व्यापारिक वातावरण को असंतुलित कर रही हैं और देश के 9 करोड़ से अधिक व्यापारियों के सामने गंभीर चुनौती खड़ी कर रही हैं, जो आपूर्ति श्रृंखला और रोजगार का प्रमुख आधार हैं। उन्होंने बताया कि प्रिडेटरी प्राइसिंग, अत्यधिक छूट डीप डिस्काउंटिंग, डार्क पैटर्न्स, मार्केटप्लेस के नाम पर इन्वेंट्री आधारित मॉडल, चुनिंदा विक्रेताओं को प्राथमिकता और डार्क स्टोर्स का तेजी से विस्तार जैसी प्रथाएं न केवल प्रतिस्पर्धा के खिलाफ हैं, बल्कि छोटे और मध्यम व्यापारियों के अस्तित्व के लिए खतरा बन चुकी हैं। प्रदेश सचिव अशोक दौलतानी ने कहा कि ऐसी कंपनियों को भारत में मनमानी करने की अनुमति नहीं दी जा सकती। ऑफलाइन और ऑनलाइन व्यापार के बीच समान अवसर सुनिश्चित करना संतुलित और स्थायी आर्थिक वृद्धि के लिए आवश्यक है। उन्होंने सरकार से राष्ट्रीय ई-कॉमर्स नीति को शीघ्र अंतिम रूप देने, कड़े और पारदर्शी नियम लागू करने तथा इन अनियमितताओं पर अंकुश लगाने के लिए सशक्त निगरानी और प्रवर्तन तंत्र स्थापित करने की मांग की। कैट ने राष्ट्रीय रिटेल विकास परिषद के गठन की मांग करते हुए कहा कि इससे नीतियां अधिक व्यवहारिक, प्रभावी और जमीनी हकीकत के अनुरूप बन सकेंगी।

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