अनोखा तीर, मसनगांव। जल संसाधन विभाग द्वारा ग्रीष्मकालीन मूंग की फसल के लिए तवा डैम से हरदा जिले हेतु आज नहर में पानी छोड़ा जाएगा, लेकिन क्षेत्र के किसान इस वर्ष भी नहर के पानी से वंचित रहेंगे। विभाग द्वारा पिछले 12 वर्षों से मूंग सिंचाई के लिए नहर में पानी छोड़ा जा रहा है, परंतु यह पानी क्षेत्र के किसानों तक आज तक नहीं पहुंच पाया है, जिससे उनकी आर्थिक स्थिति प्रभावित हो रही है। क्षेत्र के किसान हर वर्ष विभाग से टेल क्षेत्र तक पानी पहुंचाने की मांग करते हैं, लेकिन अब तक यह मांग पूरी नहीं हो सकी है। सोनतलाई सब डिवीजन में 11 हजार हेक्टेयर क्षेत्र में से मात्र ढाई हजार हेक्टेयर में ही मूंग फसल के लिए नहर से पानी मिल रहा है, जबकि लगभग 8 हजार 500 हेक्टेयर रकबा पानी से वंचित है, जिससे किसानों को मूंग फसल का लाभ नहीं मिल पा रहा है। विभाग द्वारा जिले के लिए 1900 क्यूसेक पानी नहर में छोड़ा जाता है, लेकिन यह पानी झंझरी शाखा से कुछ दूरी तक ही सीमित रह जाता है। बीड़ तक के किसान इसका लाभ ले पाते हैं, जबकि कमताड़ा, मसनगांव, कांकरिया, खमलाय, सालाबेड़ी और गाढगी के किसान हर साल इससे वंचित रह जाते हैं। कमताड़ा के किसान सतीश फुलरे और अरविंद मोरछले ने बताया कि जल संसाधन विभाग ने कभी भी टेल क्षेत्र तक पानी पहुंचाने में रुचि नहीं दिखाई, जिसका खामियाजा किसानों को भुगतना पड़ता है। वहीं, पवन भायरे और नितेश पाटिल ने बताया कि नहर पक्की होने के बाद भी रबी सीजन में क्षेत्र के किसानों के साथ भेदभाव किया जाता है। मूंग फसल के लिए नहर में बार-बार पानी कम कर दिया जाता है, जिससे फसल प्रभावित होती है। गेहूं और चना जैसी फसलों को भी समय पर पानी नहीं मिल पाता, जिससे उत्पादन घट जाता है। उन्होंने बताया कि बढ़ती महंगाई और खेती की लागत के कारण गेहूं, चना और सोयाबीन जैसी फसलें खर्च में ही निकल जाती हैं। ऐसे में किसानों के पास तीसरी फसल के रूप में मूंग ही विकल्प बचता है, लेकिन इसका लाभ भी उन्हें नहीं मिल पा रहा है। किसानों ने विभाग से एक वर्ष हेड और एक वर्ष टेल क्षेत्र को पानी देने की मांग की थी, लेकिन इस पर कोई सुनवाई नहीं हुई, जिससे किसान मूंग की फसल बोने से वंचित रह रहे हैं।
ट्यूबवेल खनन कर बना रहे व्यवस्था
नहर से पानी नहीं मिलने के कारण क्षेत्र के अधिकांश किसान तीसरी फसल के लिए ट्यूबवेल खनन कर रहे हैं। पिछले एक माह में ही क्षेत्र में सैकड़ों ट्यूबवेल खोदे जा चुके हैं। किसान मूंग की फसल बोने के लिए रबी सीजन की फसल की आय भी लगाने को तैयार हैं, लेकिन पानी की कमी के चलते कई ट्यूबवेल सूख रहे हैं, जिससे किसानों को नुकसान उठाना पड़ रहा है। इसके बावजूद मूंग फसल की उम्मीद में ट्यूबवेल खनन का सिलसिला जारी है।
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