अनोखा तीर, खिरकिया/छनेरा। तपस्वी संत, कठोर तपस्या के साधक, स्थानकवासी परंपरा के तेजस्वी संत शीतल राज जी म. सा. का गुरुवार को छनेरा (नया हरसूद) क्षेत्र में भव्य आगमन हुआ। आशापुर शिशु मंदिर से प्रारंभ हुए विहार में श्रद्धालुओं का उत्साह देखते ही बन रहा था। तीस वर्ष बाद पधारे गुरुदेव के स्वागत में बड़ी संख्या में भक्ति भाव से ओतप्रोत श्रावक एवं श्राविकाएं उपस्थित रहीं। गुरुदेव के स्वागत में छनेरा (नया हरसूद), आशापुर श्री संघ, खिरकिया संघ सहित बालाघाट, दुर्ग, सवाईमाधोपुर, इंदौर, शाजापुर और बड़वाह के संघ शामिल हुए। खिरकिया श्री संघ से संरक्षक स्वरूपचंद सांड, ज्ञानचंद मेहता, वरिष्ठ श्रावक अशोक कोचर, अनिल कोचर, सतीश मेहता, विनय भंडारी, ललित मेहता, प्रियेश मेहता, प्रभव मेहता, दक्ष मेहता, पर्व मेहता सहित बड़ी संख्या में श्राविकाएं भी सम्मिलित हुईं। तीस वर्ष पूर्व जिन बच्चों ने गुरुदेव के दर्शन किए थे, वे अब युवा और प्रौढ़ अवस्था में पहुँच चुके हैं। इस ऐतिहासिक आगमन का दृश्य श्रद्धा और उत्साह से परिपूर्ण रहा। दोपहर 3 बजे शांति प्रभा विला (नवकार नगर) में मुकेश आशीष बनवट निवास पर गुरुदेव के श्रीमुख से महा मांगलिक आयोजित हुआ, जिसमें बड़ी संख्या में श्रावक-श्राविकाओं ने लाभ लिया। मांगलिक के बाद आतिथ्य सत्कार के लाभार्थी मुकेश कुमार और आशीष कुमार बनवट रहे। अनेक श्रावकों एवं श्राविकाओं ने स्तवन कर भाव व्यक्त किए। प्रभावना के लाभार्थी स्वरूपचंद, संदीप कुमार और पंकज सांड (खिरकिया परिवार) रहे। कार्यक्रम का संचालन श्री श्वेतांबर जैन श्रावक संघ द्वारा किया गया, जिसे राजेश बनवट ने संभाला।

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