श्री रामकथा में कथा प्रसंग के साथ धर्म और समाज पर खुलकर बोले महाराज
अनोखा तीर, हरदा। बिना सत्संग के विवेक नहीं होता और बगैर भगवान की कृपा से सत्संग नहीं मिलता। सत्संग करो लेकिन कुसंग को छोड़ दो। साधक स्त्री-पुरुष नहीं होता है, जिसमें भेद और भ्रांति की निवृत्ति हो जाती है वही साधक कहलाता है। उक्त विचार स्थानीय कच्छकड़वा पाटीदार धर्मशाला में श्री रामकथा के छटवें दिन राम विवाह प्रसंग से पूर्व कथावाचक श्रद्धेय मदनमोहन व्यास जी महाराज ने व्यक्त किए। मुंबई से आए महामंडलेश्वर बालयोगी बालकदास जी महाराज एवं राजस्थान के संत श्री रामसेवकदास जी महाराज द्वारा श्रीरामचरित मानस ग्रंथ की पूजा तथा व्यासपीठ पर बैठे कथावाचक श्री मदनमोहन जी महाराज का अभिनंदन कर कथा का शुभारंभ किया गया। कथा के प्रारंभ में श्री व्यास जी ने कहा कि हम मस्तराम बाबा के आशीर्वाद की छत्रछाया में बैठकर मानस के माध्यम से उनकी मानसी पूजा कर रहे है। उन्होंने कहा बहुत से लोग घर बैठकर लाईव कथा सुन रहे है, लेकिन मंडप में बैठकर सुनने वालों की यह साधना भी है। वैसे तो प्रभु श्रीराम के जीवन चरित्र की अनेक कथाएं पढ़ी सुनी होगी, लेकिन जब संत सानिध्य में बैठकर कथा का रसास्वादन किया जाता है तो वह कथा भी पूजा और साधना बन जाती है। सब जानते है कि दूध से ही घी बनता है। लेकिन दूध से दीपक नहीं जलता, उसके लिए अलग-अलग विधि अपनाना होती है तब उसमें से घी निकलकर आता है। परमात्मा सब जगह है, लेकिन आप अवस्थाओं का अनुभव नहीं करोंगे और सीधे उसमें कूद जाओंगे तो कुछ नहीं मिलेगा। जीवन भटकाव नहीं यात्रा होना चाहिए और उसके लिए कोई लक्ष्य रखकर चलना जरुरी है। जब भोग प्रवृत्ति हमको नहीं छोड़ती तो केवल साधना, सत्संग ही हमें इससे दूर कर सकता है। श्री व्यास जी ने अहिल्या प्रसंग सुनाते हुए कहा कि यह वास्तव में भक्त का ऋण भगवान ने उतारा है। भक्त की तपस्या से भगवान खम्बे से प्रगट हुए थे अब भगवान ने भक्त को पत्थर से पुर्नअवतरित कर दिया। वहीं गोस्वामी तुलसीदास जी द्वारा श्रीराम के स्वभाव का जो वर्णन मानस में किया है और लिखा है कि राम की तुलना किससे करुं उस प्रसंग से ही आंखें सजल हो जाती है। इसी के साथ श्रीराम का जनकपुरी में नगर भ्रमण तथा सुमन वाटिका में पुष्प तोड़ने से लेकर सीता की सखियों द्वारा श्रीराम दर्शन आदि का सुंदर वर्णन और प्रसंग सुनाया। उन्होंने कहा कि गृहस्थ आश्रम का आदर्श केवल राम दरबार है। यह हर घर में होना चाहिए। प्रभु श्रीराम ने सीताराम अवतार ही हमारे समाज को पुरुष और नारी का चरित्र कैसा हो यह बताने के लिए लिया था। आजकल तो लोग धर्म तक बदल देते है। वह तो भगवान प्रकट नहीं हो रहे वरना दुनिया उनकी क्या स्थिति करें यह भगवान ही जाने। धर्म साधना भी है, साधन भी है, समाधान भी और समाधि भी है। जो बुद्धि की शुद्धि करना चाहता है वह धर्मसभा में आकर बैठता है। धर्म आंतरिक शुद्धि के लिए होता है। आजकल तो प्रजातंत्र में बुद्धिमानों की जगह बुद्धिहीनों का ज्यादा बोलबाला देखा जाता है। चंचल मन संसार है और स्थिर परमात्मा। सुधरे हुए मन से बड़ा मित्र नहीं होता और बिगड़े मन से बड़ा दुश्मन नहीं। उन्होंने मन को लेकर एक प्रसंग सुनाते हुए कहा कि एक भिखारी एक दिन भीख मांगने निकला तो अपनी झोली में एक मुट्ठी चावल घर से रख लिए। रास्ते में सम्राट को आते देखा तो खुश हो गया कि आज बहुत कुछ मिलेगा। लेकिन सम्राट को किसी ने बताया था कि अगर भिखारी से भीख मांगोंगे तो तुम्हारे राज्य में और सम्पन्नता आ जाएगी। सम्राट ने उस भिखारी से ही भीख मांग ली। मन में काफी पीड़ा और भला बुरा बोलते हुए भिखारी ने चार दाने सम्राट को दे दिए। चूंकि लेने वाले को देने में बड़ी दिक्कत होती है। उस दिन भिखारी एक धनी बस्ती में गया और वहां जल्दी ही उसकी झोली भरा गई। घर आया तब भी वह सम्राट को कोस रहा था। वहीं उसकी पत्नी ने झोली खाली की तो उसमें चार सोने के मोती मिले। जब यह बात भिखारी को बताई तो उसने कहा कि यह वही चार दाने है जो मैनें सम्राट को दिए थे। अब सोचने लगा काश में पूरे चावल ही सम्राट को दे देता। यह हमारे मन की विषयी प्रवृत्ति है। जो बुद्धि के स्तर पर पहुंच गया वह साधक हो जाता है और चित्त की अवस्था में पहुंच गया अर्थात् चित्त की शुद्धि ही सिद्धि है। पतीत को जो पावन बना दें वह रामकथा है। श्री व्यास जी ने कहा कि राम पाया नहीं बना जाता है। समर्थ रामदासजी महाराज का उल्लेख करते हुए उन्होंने कहा कि रामदासजी ने दासबोध में लिखा है कि १३ करोड़ राम जपने से रामदर्शन होता है। जब एक व्यक्ति ने उनसे पूछा क्या यह सत्य है कि राम मिलेंगे। तब उन्होंने कहा कि तुम एक बार जप कर तो देखों, राम मिले न मिले तुम स्वयं राम हो जाओंगे। संतों का जीवन देखिए वह हर किसी को राम नाम की दीक्षा देते है। अगर कोई पूछे तुमने राम को देखा है तो जिनके जीवन में ही राम नाम के सिवाय कुछ है ही नहीं उसे राम दर्शन की अब क्या लालसा रह जाती है। राम से बड़ा राम का नाम। श्री व्यास जी ने कहा कि जिस सागर में जहर था उसी में अमृत भी मिला। जिस मन में वासना है उसी में उपासना होनी चाहिए। साधु मरता भी हंसते हंसते है और लोग जीते भी रोते-रोते है। श्री व्यास जी ने कहा कि कभी तो लगता है कि साधु महिमा पर ही कथा करूं। साधु कितने प्रकार के होते है- सात्विक साधु, राजकीय साधु, तामसिक साधु, उनकी बुद्धि कैसी होती है, उनके विचार, स्वभाव क्या होता है। मानस साधु ही लिखा और बोला जा सकता है। उन्होंने कहा कि जीवन में अभिमान नहीं स्वाभिमान होना चाहिए। श्री राम अपने साथ सम्पत्ति का खजाना लेकर नहीं चलते थे। बल्कि वह दुर्जनों का संहार करते और सज्जनों से लुटी सम्पत्ति उन्हें देकर तथा उनकी सम्पत्ति को सुरक्षित करने का मार्ग आसान करते थे। समाज में सम्पत्ति दुर्जनों से लेकर सज्जनों को दे देना चाहिए, ऐसी राष्ट्रनीति होना चाहिए। श्री व्यास जी ने कहा कि रामायण में तीन स्थानों का सर्वाधिक वर्णन किया गया है, अयोध्या, मिथिला और लंका। आप सभी जानते है कि लंका पूरी सोने की थी, लेकिन क्या वहां लोग सुखी थे। फिर अयोध्या और सबसे गरीब मिथिला थी। उन्होंने इसका विस्तार से प्रसंग सुनाया वहीं वाटिकाओं में सुमन वाटिका और अशोक वाटिका का वर्णन करते हुए कहा कि सुमन वाटिका श्रीराम से सीताजी का मिलन कराने वाला स्थान है, वहीं अशोक वाटिका श्रीराम के विरह का स्थान है। सुमन की व्याख्या करते हुए कहा कि जैसे पुष्प को सुमन कहते है वैसे ही मन भी सुमन होना चाहिए। व्यक्ति को दूसरों की नजरों की बजाए स्वयं की नजर में सही होना ज्यादा जरुरी है। आप जीवन में भोजन खूब करें, लेकिन भजन न छोड़े। मानव जीवन का भजन के माध्यम से प्रस्तुतिकरण करते हुए कहा कि शरीर रथ है, इंद्रियां घोड़े है, मन लगाम और बुद्धि सारथी है, जिस पर सवार हमारी आत्मा है। इसी के साथ श्रीरामचरित मानस में शिव धनुष तोड़ने तथा सीता-राम विवाह प्रसंग का सुंदर शाब्दिक वर्णन करते हुए श्री व्यास जी ने श्रोताओं को नाचने झूमने पर विवश कर दिया। राम विवाह प्रसंग के साथ ही कथा को विश्राम दिया गया। ग्रंथ पूजा के अवसर पर पर्यावरण प्रेमी गौरीशंकर मुकाती, मस्तराम बाबा के साथ लम्बा समय व्यतीत करने वाले सेवानिवृत्त एसडीओ सुभाष सिंघई, रुपई एग्रो के डायरेक्टर संजय तेंगुरिया, संजय चौधरी, भाजपा नेता उदय चौहान, दयाराम भाटी आदि ने आरती कर महाराजश्री से आशीर्वाद प्राप्त किया।


Views Today: 2
Total Views: 240

