आजकल धर्म के अंदर आतंकवाद पनप रहा है : मदनमोहन महाराज

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धर्म के ठेकेदार सच्चे और अच्छे लोगों को पनपने नहीं देते
अनोखा तीर, हरदा। वृंदावन के प्रसिद्ध कथावाचक बाल ब्रम्हचारी मदनमोहन व्यास जी महाराज ने हरदा में श्री रामकथा दौरान कहा कि धर्म को न केवल धंधा बना लिया है बल्कि धर्म के अंदर आतंकवाद भी पनपने लगा है। उन्होंने व्यासपीठ से कहा कि साम्प्रदायिकवादी लोगों ने उस विश्व स्वरुप को समझने में बहुत गलती की है। आजकल हर २० वर्ष में कोई नया भगवान अवतरित हो जाता है। कलयुग में नए-नए संत, नए-नए पंथ और नए ग्रंथ तथा नए-नए कलयुगी भगवान पैदा हो रहे है। जिनका वेदों में कोई वर्णन नहीं है। धर्म के बड़े-बड़े ठेकेदार सच्चे और अच्छे लोगों को पनपने नहीं देते। ऐसे लोगों ने धर्म को धंधा बनाकर उसका दुरुपयोग करना शुरु कर दिया है। यह किसी एक धर्म या सम्प्रदाय की बात नहीं है बल्कि सामाजिक और राष्ट्रीयता के साथ धार्मिक चेतना और चिंतन का विषय भी है। धर्म के अंदर आतंकवाद पनप रहा है, लेकिन इस विषय पर बोला भी नहीं जा सकता और रहा भी नहीं जा सकता। मेरे पास इसके अनेक प्रमाण है। यह मेरी आंतरिक पीड़ा भी है। जिन लोगों को जहां नहीं होना चाहिए वह वहां है और जिन्हें होना चाहिए वह नहीं। श्री व्यासजी ने कहा कि आप स्वयं देखे ममता कुलकर्णी जैसी अभिनेत्री को महामंडलेश्वर बना दिया गया। आज फिल्म वाले महामंडलेश्वर बनने लगे और महामंडलेश्वर फिल्मों में अभिनय करने पहुंच रहे है। क्या हो गया है उन अखाड़ों को जिन्हें धर्मध्वजा की रक्षा के लिए गठित किया गया है। धर्म को मजाक बना दिया है। भीड़ तो चमत्कार को नमस्कार करती है और धार्मिक ठेकेदारों द्वारा जिसे महिमामंडित कर दिया जाता है वह वहां शरणागत हो जाती है। मैं इस विषय पर ज्यादा नहीं बोलना चाहता, लेकिन इतना अवश्य कहूंगा कि जब दुर्जन सम्पन्न हो जाता है तब पैसे से वस्तु नहीं व्यक्ति खरीदे जाते है और फिर समाज में व्याभिचार, अनाचार, अत्याचार और भ्रष्टाचार जैसी दुष्प्रवृत्तियां पनपने लगती है। मैं सम्पन्नता का विरोधी नहीं हूं, लेकिन सद्मार्ग और सद्कर्म से आने वाली सम्पन्नता परिवार और समाज के लिए हितकर होती है। वहीं कुमार्ग से आने वाली सम्पन्नता से व्यक्ति सुखी नहीं हो सकता और वह समाज व राष्ट्र के लिए भी घातक होती है।

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