-नर्मदा पथ पर पैदल परिक्रमा में आ रही परेशानी
अनोखा तीर, हंडिया। अमरकंटक से भरूच (गुजरात) तक शांत और निर्मल गति से बहने वाली मां नर्मदा के अस्तित्व पर अवैध रेत खनन और अतिक्रमण धीरे-धीरे पैदल परिक्रमा करने वाले भक्तों के लिए परेशानी का सबवे बनता जा रहा है। इससे परिक्रमावासियों को तमाम कठिनाइयों का सामना करना पड़ रहा है। सदियों से नर्मदा मैया की परिक्रमा करने वाले लोग चतुर्थ मास के बाद अपनी यात्रा आरम्भ करते हैं। नर्मदा की तलहटी में बांदी लगाने वाले लोग बबूल के कांटे की बाग़ लगाकर नर्मदा की पगडंडी को भी अवरुद्ध कर देते हैं, जिससे परिक्रमा करने वालों की समस्याएँ और बढ़ जाती हैं। कुछ संतों का कहना है कि जब प्रदेश सरकार नर्मदा एक्सप्रेस-वे बनाने के लिए करोड़ों रुपए खर्च कर सकती है, तो नर्मदा पथ में अवैध अतिक्रमण करने वालों पर कार्रवाई क्यों नहीं करती। कई स्थानों पर कांटे की बाग़ लगाकर पैदल परिक्रमा पथ को अवरुद्ध किया जा रहा है। प्रतिदिन सैकड़ों महिला, पुरुष और बच्चे परिक्रमा के उद्देश्य से दोनों किनारों पर आते-जाते हैं। संतों का सवाल है कि क्या प्रदेश के मुखिया इस ओर ध्यान देंगे या मां नर्मदा का निरंतर दोहन ऐसे ही चलता रहेगा और जिम्मेदार केवल दर्शक बने रहेंगे।
इनका कहना है..
पुण्य सलिला मां नर्मदा के दोनों खंडों में व्यापक पैमाने पर हो रहे अवैध खनन और तलहटियों में बढ़ रहे अतिक्रमण के कारण परिक्रमावासियों को पैदल परिक्रमा करने में कठिनाइयों का सामना करना पड़ रहा है। प्रशासन को चाहिए कि वह पगडंडी पर हुए अवैध अतिक्रमण को हटाकर परिक्रमा के लिए पैदल मार्ग को सुगम बनाये ताकि परिक्रमावासी आसानी से यात्रा कर सकें।
पंडित कृपाशंकर भागवताचार्य

Views Today: 2
Total Views: 246

