पोला शनि अमावस्या पर हजारों श्रद्धालुओं ने मां नर्मदा के घाटों पर लगाई आस्था की डुबकी
पोला अमावस्या पर हर घर में होती हैं बैलों की पूजा

अनोखा तीर नर्मदापुरम। पोला शनि अमावस्या के अवसर पर शनिवार को हजारों श्रद्धालुओ ने जीवन दायिनी मां नर्मदा में आस्था की डुबकी लगाई। नर्मदापुरम के सेठानी घाट, कोरी घाट, विवेकानंद घाट सहित शहर के सभी घाटों पर अलसुबह से ही श्रद्धालुओं ने पहुंचकर नर्मदा में स्नान किया। घाट पर पूजन-पाठ व मां नर्मदा की आराधना की। कई श्रद्धालुओं ने घाट पर सत्यनारायण भगवान की कथा भी कराई।पोला अमावस्या पर हर घर में बेलों को पूजा जाता हैं। किसान बैलों से हजारों वर्षों से हल चलाने, खेत की जुताई करने और गाड़ियां खींचने जैसे कामों के लिए उपयोग करते थे , जिससे खेती अधिक सुगम और कुशल हो गई थी। वह खेती अब आधुनिक हो गई है गाय बैल अब सड़कों पर नजर आ रहे हैं। आज का किसान आधुनिक मशीनों के माध्यम से खेती कर रहा है। अब हर घर में पहले अमावस्या पर मिट्टी के बैलों की पूजा होती है। बाजार में मिट्टी से बने रंगीन बैलों की दुकानें भी लगी है। मिट्टी के बैल 40 जोड़ से 200 रुपये जोड़ तक में बिक रहे हैं। पंडित अरुण जोशी ने बताया कि इस बार पोला अमावस्या शनिवार को पढ़ी हैं। पोला शनि अमावस्या का धार्मिक महत्व है, आज के दिन किसान आपने आपने घरों में मिट्टी के बैलों की पूजा करते हैं। क्योकि बैल किसानों की खेती में अहम भूमिका निभाते थे बैल हल बखर के माध्यम से खेतों को बनाते थे। आज के दिन बैलों की पूजा करते हैं बैलों के लिए कई प्रकार के पकवान भी बनाते हैं । इस दिन शनिदेव की पूजा की जाती है, जिससे शनि दोष से मुक्ति मिलती है और पितरों को प्रसन्न करने के लिए तर्पण व पिंडदान भी किया जाता है, जिससे घर में सुख-समृद्धि आती है। शनिदेव की पूजा: यह दिन शनिदेव की पूजा और शनि दोष से मुक्ति पाने के लिए विशेष रूप से शुभ माना जाता है। शनि की साढ़ेसाती और ढैय्या से मुक्ति के लिए इस दिन शनि मंत्र का जप और शनिदेव को सरसों का तेल अर्पित किया जाता है। पितरों की शांति:अमावस्या तिथि पितरों को समर्पित होती है, इसलिए इस दिन पितरों का तर्पण और पिंडदान करने से उन्हें मोक्ष की प्राप्ति होती है और पितृ दोष दूर होता है। आत्मशुद्धि: यह दिन आत्मविश्लेषण और अपने दोषों को सुधारने का अवसर प्रदान करता है, जिससे मन मजबूत होता है और नकारात्मक ऊर्जा दूर होती है। पोला (त्योहार) का महत्व पोला मध्यप्रदेश महाराष्ट्र और छत्तीसगढ़ में किसानों द्वारा मनाया जाने वाला एक उत्सव है जो कृषि में बैलों का योगदान था इस लिए उनका आभार व्यक्त करता है। यह पिठोरी अमावस्या पर पड़ता है, और किसान इस दिन अपने बैलों को सजाकर उनकी पूजा करते हैं। शनि अमावस्या पर शनिदेव की पूजा करें, शनि मंत्र का जप करें, सरसों का तेल अर्पित करें, और पितरों का तर्पण व पिंडदान करें।
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