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Friday, 16 October 2026
मध्य प्रदेश हरदा

आखिर इतनी बदतर क्यों हो गई बीएसएनएल सर्विस

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कहीं निजी टेलिकॉम कंपनियों से सांठगांठ तो नहीं कर ली

दैनिक अनोखा तीर, हरदा। संचार क्रांति के युग में भारतीय दूरसंचार कंपनी की सेवाएं इतनी लचर कैसे होती जा रही है। निजी टेलिकॉम कंपनियों के टैरिफ बढ़ोतरी के बाद जो उपभोक्ता बीएसएनएल से जुड़े थे आज वह वापस महंगी दरों के बावजूद उन्हीं कंपनियों की शरण में जाने को क्यों विवश हो रहें हैं। कहीं यह निजी टेलिकॉम कंपनियों के घटती उपभोक्ता संख्या को देखते हुए इन कंपनियों द्वारा बीएसएनएल अधिकारियों से कथित रूप से सांठगांठ करने का परिणाम तो नहीं है। आखिर क्या कारण है कि उपभोक्ताओं का बीएसएनएल से मोह भंग होते जा रहा है और कंपनी की सेवाएं निरंतर बद से बद्तर होती जा रही है। बीएसएनएल सर्विस का आलम यह है कि किसी को फोन लगाया जाता है तो कभी नंबर सेवा में नहीं है, कभी बात करते करते ही अचानक बातें बंद होकर रिकॉर्ड चालू हो जाता है कि यह नंबर सेवा में नहीं है। आखिर जिस नंबर पर दूरे नेटवर्क प्लान से आसानी से बात हो जाती है उसी नंबर को बीएसएनएल सेवा में नहीं होना कैसे बताने लगता है। हर दिन घंटों नेटवर्क बंद रहना, नेट सेवा चाहें जब बंद हो जाना, ग्रामीणों क्षेत्रों की तो छोड़िए शहरी क्षेत्र में भी नेटवर्क नहीं मिलना, यह बस क्यों होता है। आज 4 जी और 5 जी के युग में भारतीय दूरसंचार कंपनी की सेवाएं इतनी लचर होना, इस बात की ओर संकेत करती है कि भीतरखाने में कुछ ना कुछ तो गडबड चल रहा है। सरकार को चूना लगाने और निजी टेलिकॉम कंपनियों को फायदा पहुंचाकर अधिकारी कहीं अपना हितलाभ तो नहीं साध रहे हैं। आखिर उपभोक्ता पैसे देकर क्यों परेशान हो।

सेवा में कमी पर है जुर्माने का प्रावधान

यह बात कम ही उपभोक्ता जानते हैं कि दूरसंचार सेवा में कमी या निरंतर सेवाएं प्रदान नहीं करने पर कानूनी तौर पर जुर्माने का प्रावधान भी है। विधिक रूप से जिला स्तर पर 24 घंटे या इससे ज्यादा इंटरनेट सेवाएं बाधित रहने पर दूरसंचार कंपनियों को उपभोक्ताओं को मुआवजा देना होता है। दूरसंचार रेगुलेटर ट्राई की ओर से गुणवत्ता सेवा नियमों में पर्याप्त इंटरनेट न मिलने पर जुर्माने का प्रावधान किया गया है। ट्राई के नए नियमों के तहत प्रत्येक गुणवत्ता मानक को पूरा न करने पर जुर्माने की राशि 50,000 रुपये से बढ़ाकर एक लाख रुपये कर दी गई है। रेगुलेटर ने एक्सेस सेवाओं (वायरलेस व वायरलाइन) और ब्रॉडबैंड (वायरलेस व वायरलाइन) सेवा संशोधित विनियम, 2024 के तहत नियम उल्लंघन के विभिन्न पैमानों के लिए एक लाख, दो लाख, पांच लाख और 10 लाख रुपये की श्रेणीबद्ध जुर्माना व्यवस्था शुरू की है। बेसिक और सेलुलर मोबाइल सेवाओं, ब्रॉडबैंड सेवाओं और ब्रॉडबैंड वायरलेस सेवाओं के लिए सेवा की गुणवत्ता को बनाये रखने के लिए ही उपभोक्ताओं के हित में ये नियम बनाये गए हैं। नए नियमों के तहत एक जिले में नेटवर्क में बाधा की स्थिति में दूरसंचार ऑपरेटर्स को पोस्टपेड ग्राहकों को मासिक शुल्क में छूट प्रदान करनी होगी और प्रीपेड ग्राहकों की वैधता बढ़ानी होगी।
रेगुलेटर मासिक शुल्क में छूट या वैधता की गणना के लिए एक दिन में 12 घंटे से अधिक की नेटवर्क बाधा अवधि को एक पूरे दिन के रूप में गिनेगा। हालांकि, प्राकृतिक आपदा के कारण होने वाली समस्याओं को इसमें शामिल नहीं किया गया है। नियमों का उल्लंघन होने पर यदि इंटरनेट कम्पनियों द्वारा राहत नहीं दी जाती तो ग्राहक उपभोक्ता अदालत की शरण ले सकता है।

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