20 फीसदी से ज्यादा नहीं होंगे तबादले

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नई तबादला नीति पर सीएम की मुहर का इंतजार

अनोखा तीर, हरदा। मध्यप्रदेश में लम्बे समय से तबादलों से बैन हटने का इंतजार किया जा रहा है। चूंकि अभी तक मंत्रियों को जिले का प्रभार नहीं मिला था इसलिए भी तबादला नीति लागू नहीं की गई थी। लेकिन हाल ही में मुख्यमंत्री मोहन यादव ने मंत्रियों को जिले का प्रभार सौंप दिया है। इसी के साथ प्रदेश सरकार के सामान्य प्रशासन विभाग ने नई तबादला नीति का मसौदा तैयार कर मुख्यमंत्री सचिवालय को भेज दिया है। माना जा रहा है कि एक दो दिन में ही इस नई तबादला नीति पर मुख्यमंत्री की मुहर लगने के पश्चात उसे अगली केबिनेट बैठक में रखकर स्वीकृति प्राप्त की जाएगी। वैसे सामान्य प्रशासन विभाग द्वारा जो नई तबादला नीति बनाई गई है उसमें पुरानी से हटकर नया कुछ देखने को नहीं मिलेगा। पूर्व की भांति ही इस नई नीति में भी जिले के अंदर होने वाले तबादले प्रभारी मंत्री की अनुशंसा पर ही किए जाएंगे। वहीं एक जिले से दूसरे जिले में होने वाले तबादले संबंधित विभागीय मंत्री द्वारा ही किए जा सकेंगे। जिला स्तर के वरिष्ठ प्रशासनिक अधिकारी जैसे कलेक्टर, एसपी, डीएफओ आदि के तबादले मुख्यमंत्री की सहमति उपरांत ही संभव होंगे। जिन छोटे विभागों में महज 200 कर्मचारियों तक का अमला कार्यरत है वहां 20 प्रतिशत तक तबादले हो सकेंगे। इसी तरह 200 से 2 हजार तक के संवर्ग में 10 प्रतिशत से अधिक ट्रांसफर नहीं हो पाएंगे। वहीं 2 हजार से अधिक की तादाद वाले विभागों में 5 प्रतिशत तक के तबादले किए जाने का मसौदा तबादला नीति में तय किया गया है। इसी तरह पुरानी तबादला नीति में स्वेच्छिक स्थानांतरण प्राप्त करने वाले कर्मचारियों को विशेष परिस्थितियों को छोडक़र तीन साल के भीतर तबादले नहीं करने का प्रावधान था वह वर्तमान नीति में भी यथावत रखा गया है। उम्मीद की जा रही है कि रक्षाबंधन के उपरांत होने वाली केबिनेट बैठक में नई तबादला नीति को स्वीकृति प्रदान कर दी जाएगी। वैसे शासन के सूत्रों का मानना है कि सरकार इस समय अतिआवश्यक तबादलों को छोडक़र अधिक तबादला करने के मूंड में नहीं है। चूंकि नया शैक्षणिक सत्र प्रारंभ हो चुका है और ऐसी स्थिति में अधिक तबादले करने से अधिकारी-कर्मचारियों को नए स्थान पर अपने बच्चों के एडमिशन को लेकर भारी परेशानी का सामना करना पड़ सकता है। वहीं एक साथ थोकबंद होने वाले तबादलों को लेकर विपक्षी दलों द्वारा भी सरकार पर आरोप प्रत्यारोप लगाए जाने लगते है। खैर तबादलों से प्रतिबंध हटने पर कितने तबादले हो पाते है यह तो समय बताएगा, लेकिन जिला स्तर पर सत्ताधारी भाजपा के संगठन पदाधिकारी अपनी मंशा अनुसार अधिकारियों को हटाने और पोस्टिंग कराने को लेकर सूची तैयार करने में जुट गए है।

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