अनोखा तीर, हरदा। शिक्षण-कार्य की प्रक्रिया का विधिवत अध्ययन शिक्षणशास्त्र पेडागॉजी कहलाता है। इसमें अध्यापन की शैली या नीतियों का अध्ययन किया जाता है। संस्कार विद्यापीठ में पेडागॉजी एवं लर्निंग आउटकम्स पर शिक्षक प्रशिक्षण कार्यक्रम संपन्न हुआ। कार्यक्रम में विषय विशेषज्ञ के रूप में श्रीमती अमनदीप कौर, बुधनी एवमं प्रिया सिंह सिसोदिया छिंदवाड़ा ने शिक्षक- शिक्षिकाओं को प्रशिक्षण दिया। उन्होंने बताया की शिक्षक अध्यापन कार्य करता है तो वह इस बात का ध्यान रखता है कि अधिगमकर्ता को अधिक से अधिक समझ में आए। हर अध्यापक की इच्छा होती है कि उसका शिक्षण प्रभावपूर्ण हो। इसके लिए अध्यापक को कई अध्यापन संबंधी बातों को जानकर उन्हे व्यावहारिक रूप से प्रस्तुत करना पड़ता है। साथ ही पाठ्यवस्तु का आरम्भ कहां से किया जाय, किस प्रकार किया जाय, छात्र इसमें रुचि कैसे लेते रहें, अर्जित ज्ञान को बालकों के लिए उपयोगी कैसे बनाया जाए, इत्यादि को विस्तारपूर्वक समझाया। उन्होंने बताया कि शिक्षा शास्त्रियों ने अध्यापकों के लिए इन आवश्यक बातों पर विचार करके अनेक सिद्धान्तों का प्रतिपादन किया है, जिनमें पाठ्यचर्या के उद्देश्यों से दक्षताएं निकली और इन दक्षताओं के आधार पर अधिगम प्रतिफल लर्निंग आउटकम्स तय किए गए। इसलिए हमें अधिगम प्रतिफलों लर्निंग आउटकम्स को सही से समझने के लिए शिक्षा के लक्ष्यों, पाठ्यचर्या के उद्देश्यों, दक्षताओं को भी समझना होगा। प्रशिक्षण कार्यक्रम में नॉलेज पब्लिक स्कूल टिमरनी, सूर्योदय ग्लोबल एकेडमी खिरकिया, एकेडमिक हाइट्स एवं संस्कार विद्यापीठ हरदा के शिक्षक शिक्षिकाओं ने प्रशिक्षण प्राप्त किया। कार्यक्रम में शाला प्रबंधन के लोकेश पटेल प्राचार्य एसपी भदोरिया, उपप्राचार्य श्रीमती जयंती चौहान सहित समस्त शाला परिवार उपस्थित था।
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