-कई किसान उपज बेचने से वंचित
अनोखा तीर, मसनगांव। प्रदेश में शासन के द्वारा की जा रही मूंग की खरीदी पर विराम लग गया। प्रदेश सरकार के द्वारा भले ही खरीदी की अंतिम तिथि 31 जुलाई घोषित की गई थी, परंतु समिति केंद्रो पर 26 तारीख को ही खरीदी बंद कर दी गई। इससे कई किसान अपनी उपज बेचने से वंचित रह गए। जिन किसानों ने 22 तारीख तक स्लॉट बुक किए थे, उन किसानों की उपज 26 तारीख तक तौली गई। 22 जुलाई के बाद स्लॉट बुकिंग बंद होने से कई किसान अपनी उपज बेचने से वंचित रह गए। छिदगांव तमोली के दिनेश राठौर ने बताया कि उन्होंने 23 तारीख को स्लाट बुकिंग करने की कोशिश की लेकिन बुकिंग नहीं हुई, जिससे वह अपनी उपज नहीं बेच सके। जिले में 52 कंेद्रो पर खरीदी की गई, जिसमें कुछ जगहों पर किसानों की भीड़ देखी गई। कई जगह खरीदी केंद्र में कम किसानों ने अपनी उपज की बिक्री की। क्षेत्र में सबसे अधिक तुलाई गांगला के निजी वेयरहाउस पर हुई, इसके बाद कड़ोला स्थित मां नर्मदा वेयर हाउस तथा निजी कंपनी के द्वारा खरीदी की गई। वही सुल्तानपुर स्थित शासकीय वेयरहाउस पर भी समिति के माध्यम से खरीदी हुई। जिले के लगभग 80 प्रतिशत किसानों ने अपनी उपज की बिक्री कर दी। 20 प्रतिशत किसानों में कई लोग स्लाट बुकिंग के कारण अपनी उपज नहीं बेच पाए। वहीं कुछ बड़े किसानों ने मंडी में भाव में वृद्धि को देखते हुए अपनी उपज को रोक रखी है। क्षेत्र में मूंग की फसल का अधिकतम उत्पादन 7 से 8 बोरा प्रति एकड़ के हिसाब से निकला है। शासन के द्वारा 4.80 क्वींटल प्रति एकड़ के हिसाब से खरीदी की गई। जिससे दो से तीन बोरा मुंग किसानों के पास रह गया। कुछ किसानों ने समर्थन मूल्य खरीदी से पहले ही कृषि उपज मंडी में अपनी उपज व्यापारियों को तुला दी थी। जिससे वह शासकीय खरीदी में अपने उपज नहीं बेच सके। मसनगांव समिति के सहायक प्रबंधक अखिलेश पाटिल ने बताया कि 26 तारीख को अंतिम खरीदी के बाद किसानों के बिल बनाने का काम शुरू है। जिन किसानों ने अपनी उपज तुला दी है, उनके बिल बनकर तैयार हो चुके हंै। शासन के द्वारा खरीदी की तारीख नहीं बढ़ने से खरीदी कार्य बंद कर दिया गया है।

