मोहर्रम पर सभी मस्जिदों में पढ़ी दुआ-ए-आशुरा  

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-खेड़ीपुरा में ताजिया समिति का हुआ सम्मान


अनोखा तीर, हरदा।  आशुरे के दिन रोजा रखकर शहीदाने करबला को याद किया गया। शहर की मस्जिदों एवं मदरसों में दुआए आशुरा का आयोजन कर  देश व समाज की खुशहाली के लिए दुआएं मांगी गई। शाम को मस्जिदों में रोजा इफ्तार कर सुबह ताजिए निकाले गए। शिफा समिति अध्यक्ष डॉ.रविन्द्र कुमार कुशवाहा द्वारा खेड़ीपुरा ताजिया समिति को शील्ड प्रदान कर सम्मानित किया गया। गली-मोहल्लों में हलीम बनाकर शाम को लंगर व शबील पिलाया गया। शहर के ताजिये मोहल्ला समिति के माध्यम से बाजार चौक पहुंचे जहां हिन्दू-मुस्लिम समाज के लोगों ने मन्नते उतारी। गुरूवार को दोपहर में ताजियों के निकलने का सिलसिला शुरू होगा। शाम को करबला तट पर  विसर्जन किया जाएगा। दारूल उलूम नूरी प्रमुख मोहम्मद सलीम नूरी ने बताया कि मुहर्रम शहादत का त्यौहार माना जाता हैं, इसका महत्व इस्लामिक धर्म में बहुत अधिक होता है। यह इस्लामिक कैलेण्डर का पहला महिना होता हैं इसे पूरी शिद्दत के साथ अल्लाह के बन्दों को दी जाने वाली शहादत के रूप में मनाया जाता हैं। यह पवित्र महीने रमजान के बाद पवित्र महिना माना जाता हैं। इस्लाम में भी चार महीनो को महान माना जाता है। मुहर्रम के दिनों में भी कई मुस्लिम उपवास करते हैं। साथ ही मोहर्रम पर्व पर एक विशेष दुआ का आयोजन हर मस्जिद मे होता है। मोहम्मदी मस्जिद इमाम मौलाना न्याजुल कादरी ने बताया कि इस दुआ को दुआए आशुरा कहा जाता है। इस दुआ का इतना महत्व है कि कोई व्यक्ति इस दुआ को सुन ले या पढ़ ले तो यकीनन एक साल तक उसकी जिंदगी का बीमा हो जाता है यानि उसे मौत नही आएगी ऐसी मान्यता है।

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