सरकारी स्कूलों के हाल-बेहाल

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लोकेश जाट, हरदा। जिले में नवीन शिक्षण सत्र की शुरुआत हो गई है। 18 जून को स्कूलों में प्रवेशोत्सव मनाया गया। शिक्षा की नीव मजबूत करने के लिए प्रर्याप्त शिक्षकों व सुविधाओं का होना भी अनिवार्य है। अधिकतर स्कूलों में बच्चों की दर संख्या के मान से शिक्षक कम है तो कुछ स्कूलों की छत से प्लास्टर निकल गया है और सरिये झाक रहे है, जो विद्यार्थी के लिए खतरा बने हुए है और कभी अप्रिय घटना हो सकती है। शिक्षा सत्र शुरू होने से पूर्व इन बातों का संज्ञान लेकर कमी को दूर कर दिया जाना चाहिए था मगर मूलभूत आवश्यकताओ की ओर किसी जिम्मेदार अधिकारी ने ध्यान नहीं दिया।

शिक्षकों को करना पड़ रहा साफ-सफाई

शहर के ग्वालनगर स्थित एकीकृत शासकीय माध्यमिक शाला, लाल स्कूल में ६५२ विधार्थयों को पढ़ाने के लिए १२ शिक्षक है जिनमें से दो शिक्षकों रिटायरमेंट होने वाला है। यहां माध्यमिक स्तर पर विषयवार ५ शिक्षकों की कमी है। साफ-सफाई के लिए एक भृत्य था जिसकों लोकसभा चुनाव के समय डीओ आफिस अटैच किया कर लिया गया था जिसे अभी तक रिलीव नहीं किया गया। परिसर की सफाई स्वयं शिक्षकों को ही करनी पड़ रही है।

गिर रहा छत का प्लास्टर, जोखिम में बच्चों की जान

ग्रामीण क्षेत्र अबगांव कला की प्राथमिक शाला के भवन की छत से प्लास्टर निकल गया है और सरिये झांकने लगे है। जब प्राचार्य चम्पालाल बिलोरे से इस संबंध में पूछा गया तो उनका कहना था कि कल ही पंचायत सरपंच से स्कूल की छत की मरमम्त को लेकर बात हुई है जल्द ही पूरी छत को दुरुस्त कर लिया जाएगा। अबगांव कला की ही शासकीय हाई स्कूल परिसर में बाउड्रीवाल नहीं होने के कारण लोगों द्वारा अपने वाहन खड़े करने का स्थान बना लिया है।

स्कूल भवन हुआ क्षतिग्रस्त

ग्राम आलनपुर की प्राथमिक शाला में १८ विद्यार्थी हैं। यहां पुराने भवन में ही शाला लगाई जा रही है, जिसकी छत टीन से बनी है। जबकि शाला में अतिरिक्त पक्के बने कक्ष में आगंनवाडी संचालित होती है। स्कूल में बाउंड्रीवाल नहीं होने के कारण रात्रि में शरारती व असामाजिक लोगों द्वारा स्कूल को अपना अड्डा बना लिया जाता है। कुछ शरारती लोगों ने स्कूल भवन को क्षतिग्रत कर दिया है।

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