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Monday, 19 October 2026
बैतूल

बैतूल से बीजेपी के दुर्गादास उईके एक लाख से अधिक वोटों से आगे

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अनोखा तीर बैतूल:-बैतूल संसदीय क्षेत्र में चार चरण की मत गणना के बाद बीजेपी प्रत्याशी दुर्गादास उईके एक लाख तीन हजार 92 वोट से आगे चल रहे हैं। चार चरण में हुई मतों की गिनती में बीजेपी के दुर्गादास उइके को कुल 2 लाख 27 हजार 408 वोट मिले। कांग्रेस प्रत्याशी रामू टेकाम को चार चरण में कुल 1लाख 24 हजार 316 वोट प्राप्त हुए हैं।

आदिवासी वर्ग के लिए आरक्षित बैतूल संसदीय क्षेत्र में पिछले करीब तीन दशक (28 वर्ष) से मतदाता भाजपा के साथ खड़े हैं। आठ विधानसभा क्षेत्र वाली बैतूल लोकसभा सीट में चार विधानसभा क्षेत्र एसटी वर्ग के लिए आरक्षित हैं। महाराष्ट्र की सीमा से सटे इस क्षेत्र को कभी कांग्रेस का गढ़ माना जाता था लेकिन वर्ष 1996 में भाजपा ने जब स्थानीय उम्मीदवार को मैदान में उतारा तो जनता ने उसे विजयी बना दिया। इसके बाद से क्षेत्र में लगातार भाजपा ही परचम लहरा रही है।

बैतूल लोकसभा सीट का इतिहास

वर्ष 1996 के चुनाव में भाजपा ने स्थानीय उम्मीदवार विजय कुमार खंडेलवाल को मैदान में उतारा था। उन्होंने कांग्रेस के कब्जे से सीट छीन ली थी। इसके बाद वर्ष 1998, 1999 और 2004 में भी वे लगातार जीत दर्ज करने में सफल रहे। वर्ष 2007 में विजय खंडेलवाल के निधन के बाद हुए उपचुनाव में उनके पुत्र हेमंत खंडेलवाल को भाजपा ने मैदान में उतारा। हेमंत ने जीत हासिल की। वर्ष 2009 में परिसीमन के कारण बैतूल संसदीय क्षेत्र एसटी वर्ग के लिए आरक्षित हो गई। भाजपा ने ज्योति धुर्वे को टिकट दिया। वे जीत गईं। वर्ष 2014 में भी ज्योति धुर्वे ने अपनी जीत दोहराई। वर्ष 2019 में भाजपा ने शिक्षक रहे दुर्गादास उइके को प्रत्याशी बनाया। वे रिकार्ड मतों से जीत दर्ज करने में सफल रहे।

बैतूल लोकसभा सीट का इतिहास

वर्ष 1996 के चुनाव में भाजपा ने स्थानीय उम्मीदवार विजय कुमार खंडेलवाल को मैदान में उतारा था। उन्होंने कांग्रेस के कब्जे से सीट छीन ली थी। इसके बाद वर्ष 1998, 1999 और 2004 में भी वे लगातार जीत दर्ज करने में सफल रहे। वर्ष 2007 में विजय खंडेलवाल के निधन के बाद हुए उपचुनाव में उनके पुत्र हेमंत खंडेलवाल को भाजपा ने मैदान में उतारा। हेमंत ने जीत हासिल की। वर्ष 2009 में परिसीमन के कारण बैतूल संसदीय क्षेत्र एसटी वर्ग के लिए आरक्षित हो गई। भाजपा ने ज्योति धुर्वे को टिकट दिया। वे जीत गईं। वर्ष 2014 में भी ज्योति धुर्वे ने अपनी जीत दोहराई। वर्ष 2019 में भाजपा ने शिक्षक रहे दुर्गादास उइके को प्रत्याशी बनाया। वे रिकार्ड मतों से जीत दर्ज करने में सफल रहे।

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