जिंदगी से बड़ी कोई सजा नहीं, और जुर्म क्या है पता नहीं

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अनोखा तीर, तामिया। जिंदगी से बड़ी सजा ही नहीं, और क्या जुर्म है पता ही नहीं..कृष्ण बिहारी नूर की ये पंक्तियां तामिया की गरीब महिला रांगड़ी ढोलेवार की मृत्यु पर सटीक बैठती है। सारा जीवन बांस की टोकनी खरेटा बनाकर दुकान दुकान जाकर बेचने वाली रांगड़ी बाई जीवंत देवी थी, जिन्होंने बिना भीख मांगे पुरुषार्थ कर अपना जीवन जिया। दादा जी धूनी मंदिर के पास निवासी रांगडी ढोलेवार 60 वर्ष की 5 मई 2022 में नशे में धुत्त डुंगरिया निवासी बंटी की बेलगाम कार की टक्कर के बाद दो पैर टूट जाने से बिस्तर में ही संघर्ष करते हुए बुधवार रात्रि 10 बजे अंतिम सांस ली।

दो साल पहले हिट एंड रन में रांगड़ी हुई थी गंभीर घायल

दो साल पहले कार की टक्कर से बाजार में टोकनी बेचने गई रांगड़ी के दोनों पैर टूटे तब से बिस्तर पर थी। 5 मई 2022 कि वह शाम जब नशे में धुत एक युवक की कार लहराते हुए तामिया बस स्टैंड में अमन मोबाइल दुकान को तोड़ते हुए घुस गई। इसी हादसे में तामिया की टोकनी बेचने वाली बुजुर्ग महिला रांगड़ी कार चपेट में आ गई। दोनो पैर टूट गए तब से लेकर आज तक उपचार और दर्द झेलते हुए रांगड़ी अब इस दुनिया में नहीं है। इस हादसे के बाद इस घटना से कई सवाल खड़े हो गए। इस महिला के उपचार के लिए दो साल पहले सामाजिक संगठन ने चंदा करके लगभग 35 हजार की राशि उपचार के लिए उपलब्ध कराई थी। गरीब महिला की मौत क्या मौत नहीं होती? बेहद गरीब परिवार में जीवन यापन करने वाले मुल्लू ढोलेबार की बहन 2 साल उपचार और बिस्तर में रहने के बाद तब इस दुनिया में नहीं है। सबसे बड़ा सवाल यह है कि इस हादसे के बाद कथित प्रबुद्धजनों ने तामिया मुख्य मार्ग में डिवाइडर बनाने की मांग को लेकर तहसीलदार को ज्ञापन दिया था। लेकिन आज तक तामिया के मुख्य मार्ग में डिवाइडर नहीं बना है। सड़क हादसे में मानवीय सुरक्षा को लेकर अभी तक कोई इंतजाम नहीं है।

डिवाइडर की सालों से है मांग

सड़क में इसके पहले भी कई युवाओं की मौत हादसे से हो चुकी है। एक गरीब महिला की मौत यह नजारा आज तामिया के मोक्षधाम में नजर आया। लोकसभा का चुनावी दौरा और नवरात्रि का समय लेकिन सिर्फ चमक दमक और श्रेय लेने की वाहवाही के बीच मानवीय संवेदनाओं को लेकर कोई भी जागरूक नहीं है। बुजुर्ग महिला को राहत दिलाने के लिए कोई कथित नेता जनप्रतिनिधि मिलना तो दूर कोई सामिति संगठन प्रमुख अंतिम संस्कार में नही पहुंचा। एक गरीब महिला की मौत पर सीमित परिजनों के बीच अंतिम संस्कार हुआ।

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