विशेष लेख / संपादकीय
पलासनेर की पगडंडियों पर, शब्दों का सन्यासी
‘रहता हूं वीराने में तन्हाई के सहारे, जैसे हो कोई मंदिर किसी गांव के किनारे।Ó प्रोफेसर अजातशत्रु पर लिखना आसान…
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‘रहता हूं वीराने में तन्हाई के सहारे, जैसे हो कोई मंदिर किसी गांव के किनारे।Ó प्रोफेसर अजातशत्रु पर लिखना आसान…
अजात शत्रु उसे कहते है जिसका कोई शत्रु न हो। इसी उपनाम से लेखन करने वाले प्रोफेसर आरएस यादव उर्फ…
अजातशत्रु , अर्थात ……..! (दार्शनिक व्यंग्यकार अजातशत्रु से साहित्यकार कैलाश मंडलेकर का एक गंभीर वार्तालाप) अजातशत्रु की रचना प्रक्रिया और…