यह बात गलत है

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आप जो यह तस्वीर देख रहे हैं, वह के वार्ड क्रमांक २४ का दृश्य है, जो आज या कल नही बल्कि हर रोज की समस्या है। सड़क किनारे लगने वाले कचरे के ढेर में अधिकांश प्लास्टिक की पॉलिथिन समेत अन्य सामग्री रहती है। इसके इर्दगिर्द आवारा मवेशियों कार जमघट भी लगता है। यह नजारा सोमवार को दोपहर डेढ़ बजे के आसपास देखने को मिला। हालांकि कुछ देर बाद नपा के स्वच्छता अमले ने अपने रूटीन कार्य अंतर्गत उसे कचरे का उठाव कर लिया था। किंतु इन सबके बीच दक्ष सवाल अब भी सिर उठाएं खड़ा है कि क्या प्रतिदिन ये सिलसिला जारी रहेगा ? ऐसा इसलिये, क्योंकि स्थानीय रहवासियों से ज्यादा नजदीक में संचालित शोरूम से अधिक कचरा निकलता है। जिसे बाहर सड़क पर फेंक पर इतिश्री कर लिया जाताहै। जबकि हर रोज निकलने वाले कचरे की मात्रा को ध्यान में रखकर व्यवस्था सुनिश्चित करने की दरकार है, ताकि कचरे का ढ़ेर हवा में उड़कर एक जगह से दूसरे जगह पहुंचने में देर नही करता है। वहीं दूसरा मुख्य कारण प्लास्टिक के सेवन में मवेशियों की मौत के मामले थम नही रहे हैं। इसके पीछे संबंधित नागरिकों की लापरवाही उजागर हो रही है। क्योंकि, कचरा निपटान के साथ साथ उसे कचरा वाहन के आने तक सुरक्षित रखने में फेल साबित हो रहे हैं। यही कारण है कि स्वच्छता की महत्ता को समझने वाले जागरूक लोग इस तरह की लापरवाही पर तंज कसना नही चूकते, कि यह बात गलत है।

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