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Wednesday, 4 November 2026
बैतूल

गिनीज बुक ऑफ वर्ल्ड रिकॉर्ड में दर्ज हुए बैतूल के चार तबला वादकों के नाम

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अनोखा तीर, बैतूल। हमारे देश में हुनर की कमी नहीं है। अलग-अलग शहरों में अपनी नायाब कला की वजह से देश के तमाम लोगों ने दुनिया भर में अपनी अलग पहचान बनाई है। कुछ ऐसा ही एक बार फिर हुआ है मध्य प्रदेश के ग्वालियर शहर में। दरअसल, तानसेन समारोह के अंतर्गत ताल दरबार कार्यक्रम में एक साथ 1500 से अधिक तबला वादकों की प्रस्तुति गिनीज बुक ऑफ वर्ल्ड रिकॉर्ड में अपना नाम दर्ज करा चुकी है। पीएम मोदी ने गिनीज बुक ऑफ वर्ल्ड रिकॉर्ड में अपना नाम दर्ज कराने पर सभी कलाकारों के साथ-साथ प्रदेश के मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव को बधाई और शुभकामनाएं दी हैं। मुख्यमंत्री ने भी शुभेच्छा तथा आशीर्वचन के लिए सभी मध्यप्रदेशवासियों की ओर से पीएम का आभार जताया है। पीएम मोदी ने सोशल मीडिया प्लेटफार्म एक्स पर कहा है कि यह अद्भुत, अविस्मरणीय, अद्वितीय है। मध्यप्रदेश की संगीत नगरी ग्वालियर में तानसेन समारोह के अंतर्गत आयोजित ताल दरबार कार्यक्रम में एक साथ 1500 तबला वादकों की प्रस्तुति ने गिनीज बुक ऑफ वर्ल्ड रिकॉर्ड में अपना नाम दर्ज कराने का अभूतपूर्व कार्य किया है। इस नए विश्व रिकार्ड की उपलब्धि हासिल करने पर कलाकारों के साथ ही मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव, केन्द्रीय मंत्री ज्योतिरादित्य सिंधिया, मध्यप्रदेश विधानसभा अध्यक्ष नरेंद्र सिंह तोमर की गरिमामयी उपस्थिति रही। उन्होंने आगे कहा कि मैं संगीत की दुनिया के इन सभी कलाकारों को बधाई और शुभकामनाएं देता हूं, जिन्होंने भारतीय संगीत को इस आयाम तक पहुंचाने का सराहनीय प्रयास किया है।

बैतूल के चार कलाकारों ने भी की शिरकत

मंगलवार को सांस्कृतिक विभाग द्वारा ग्वालियर किले में आयोजित हुए ऐतिहासिक कार्यक्रम में 1500 तबला वादकों के साथ संगत देने बैतूल के भी चार तबला वादकों सूर्यांश वर्मा, श्रीकांत मालवीय, खुशबू मिश्रा, कपिल परिहार ने हिस्सा लिया। मलकापुर जैसे छोटे से गांव के बचपन से ही संगीत में रुचि रखने वाले सूर्यांश वर्मा ने बताया कि एक साथ 1500 तबला वादकों ने 22 मिनट तक तीन ताल व वंदेमातरम की धुन पर प्रस्तुति देकर वर्ल्ड रिकॉर्ड बनाया। चारों कलाकारों की इस उपलब्धियां पर इनके तबला गुरु पंडित दिनेश खांडेकर, अनहद म्यूजिक के डायरेक्टर दिलीप रावत एवं इष्टमित्रों, कला प्रेमियों ने शुभकामनाएं प्रेषित की।

तीन पीढ़ियों ने तबला वादन में लिया हिस्सा

चार बरस के नन्हें तबला वादक से लेकर बड़ी उम्र के तबला साधकों से सजा दरबार इस अर्थ में भी अनूठा था कि एक साथ प्रदेश की तीन पीढ़ियां तबला वादन कर रही थीं। तानसेन की जमीन पर तबलों की थाप से सजे दरबार में तानसेन की नगरी थिरक रही थी। राष्ट्रगीत वंदे मातरम की परिकल्पना पर आधारित तबला वादकों ने तीन ताल के ठेका पर संगीत के सम्राट तानसेन को संगीतमय प्रणाम किया। हारमोनियम, सितार और सारंगी की धुन पर सजे लहरा और कायदा पर तबला वादन ने ग्वालियर किला को गुंजायमान कर दिया था। गौरतलब है कि संगीत सम्राट तानसेन की नगरी ग्वालियर में आयोजित तानसेन समारोह में अपराजेय भारतीयता के विश्वगान राष्ट्रगीत वंदे मातरम की धुन पर ताल दरबार ने राष्ट्रीयता का उद्घोष करते हुए 1500 तबला वादकों ने अपनी प्रस्तुति देकर गिनीज बुक ऑफ वर्ल्ड रिकॉर्ड में अपना नाम दर्ज कराया था। इस ऐतिहासिक पल का साक्षी बनते हुए मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने गिनीज वर्ल्ड रिकॉर्ड संस्था का प्रमाण पत्र ग्रहण किया था। इस अवसर पर केंद्रीय नागरिक उड्डयन मंत्री ज्योतिरादित्य सिंधिया और विधानसभा अध्यक्ष नरेन्द्र सिंह तोमर भी उपस्थित रहे।

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