भगवान की बाल लीलाओं का किया वर्णन

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अनोखा तीर, हरदा। अग्रवाल परिवार द्वारा आयोजित श्रीमद्भागवत कथा के षष्ठम दिवस श्रीभारती किशोरिजी ने भगवान की बाल-लीलाओं का वर्णन किया। उन्होंने कहा कि जब श्रीकृष्ण ने गोवर्धन पर्वत का पूजन करवाया तो इंद्र ने क्रोधित हो ब्रज मंडल में मूसलाधार वर्षा करवाई। भगवान कृष्ण ने एक उंगली पर गिरिराज पर्वत उठाया और कहा आ जाओ गिरिराज की शरण में ऐसे ब्रज वासियों की रक्षा की। कथा प्रसंग को आगे बढ़ाते हुए किशोरीजी ने महारास वर्णन करते हुए बताया कि रास पंचाध्याई भागवत के पंचप्राण हैं। रास पंचाध्याई के पठन श्रवण से सहज ही ठाकुर जी की भक्ति प्राप्त हो जाती है। रास के दो स्वरूप है नित्य और नैमित्तिक। नित आज भी वृंदावन में दर्शनीय होता है, जो आज भी चल रहा है वृंदावनम परित्याज्य पादमेकम न गच्छति, नित्य स्वरूप पल भर के लिए भी वृंदावन से बाहर नहीं जाता, रासलीला ना होकर बल्कि काम पर विजय प्राप्त करने वाली लीला है। कृष्ण के दो रूप वह साकार है और निराकार भी है। साकार स्वरूप आज भी वृंदावन से बाहर नहीं जाता है। किशोरीजी ने आगे बताया भगवान कि श्रीकृष्ण ने सुदामा माली पर कृपा, रजक उद्धार, कुब्जा अनुग्रह वर्णन करते हुए मामा कंस का वध किया। गोपी उद्धव संवाद की सुंदर व्याख्यान का वर्णन किया। श्रीकृष्णा अवंतिकापुरी विद्या अध्ययन करने गए और 64 दिन में 64 विद्याओं को ग्रहण किया। गुरु दक्षिणा में गुरु पुत्र लाकर के दिया। विद्या अध्ययन के पश्चात द्वारकापुरी का निर्माण कराया और वहां के राजा द्वारकाधीश कहलाए। द्वारका में भगवान श्री कृष्ण ने रुक्मणी जी के साथ विवाह किया। विवाह में भगवान श्रीकृष्ण और रुक्मणी की झांकी सजाई। वैवाहिक गीतों पर भक्त भावविभोर हो नृत्य करने लगे। विवाह उत्सव बड़ी धूमधाम से मनाया गया। कल कथा का विश्राम दिवस रहेगा। जिसमें सुदामा आदि प्रसंग भावपूर्वक श्रवण करेंगे।

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