कभी ठंड तो कभी हो रहा गर्मी का एहसास

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अनोखा तीर, मसनगांव। कार्तिक का महीना आधा निकल चुका है, लेकिन जिस ठंड की उम्मीद की जा रही थी वह नहीं पड़ रही है। सुबह सर्दी का एहसास होता है। दोपहर में गर्मी लगने लगती है। गर्मी के कारण पंखे चलाना पड़ रहे हैं। रात्रि में वापस ठंड शुरू हो जाती है। मौसम अनुकूल न होने से आमजन के स्वास्थ्य के ऊपर विपरीत असर पड़ रहा है, नवंबर के महीने को सर्दी के महीने के रूप में जाना जाता है। लेकिन पिछले कुछ वर्षों से गर्मी और सर्दी एक साथ पड़ने के कारण लोगों के स्वास्थ्य पर विपरीत असर पड़ रहा है, जिसमें बुजुर्ग और बच्चे बीमार हो रहे हैं। ग्रामीणों का कहना है कि मौसम एक जैसा रहता है तो मानव शरीर एक समान रहता है। लेकिन कभी सर्दी और कभी गर्मी के कारण हाथ पैरों में जकड़न, सर्दी जुकाम, खांसी बुखार जैसी बीमारियां लगने लगते हैं। इस समय भी कई घरों में लोग सर्दी जुखाम बुखार से पीड़ित है। वही फसलों के ऊपर भी मौसम का असर दिखाई दे रहा है। रबी सीजन में बोई गई फसलों में गर्मी के कारण उठाव नहीं है।

नमी सूखने से कम हो रहा अंकुरण

जहां सुबह शाम ठंडी बनी हुई है। वहीं दोपहर में तापमान अधिक होने के वजह से खेतों की नमी जल्दी सूख रही है। नमी सूखने से फसलों का अंकुरण कम दिखाई दे रहा है। ग्राम के किसान अजय पाटिल ने बताया कि जिन खेतों में पलेवा करके फसल बोई गई है वहां पर चना तथा गेहूं कम मात्रा में उग रहा है। जिसका मुख्य कारण खेतों में नमी की कमी बताई जा रही है। वैसे रबी सीजन की फसलों के बुवाई का सही समय 15 नवंबर के आसपास माना जाता है। इस वर्ष भी किसानों ने नवंबर के पहले सप्ताह में ही बुवाई शुरू कर दी। किसानों ने खेतों में समय पर फसलों की बुवाई की, लेकिन मौसम अनुकूल नहीं होने तथा तापमान में वृद्धि से फसलों पर विपरीत असर दिखाई दे रहा है।

बादलों से भी आ रही दिक्कत

पिछले तीन-चार दिनों से आसमान पर बदल छा जाने से भी स्वास्थ्य पर विपरीत असर दिखाई दे रहा है। वहीं खेतों में खड़ी फसलों को भी दिक्कत आ रही है। जिन खेतों में किसानों ने बोनी करके पानी लगाया है वहां पर गेहूं के अंकुरण में दिक्कत आ रही है। वहीं पलेवा किए हुए खेतों में बतर देरी से आने के कारण बुवाई में भी समय लग रहा है।

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