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Tuesday, 27 October 2026
खरगोन

चाँद देख पूजन के बाद पत्नियों ने खोला करवाचौथ व्रत

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विकास पवार बड़वाह – शास्त्रों के अनुसार करवाचौथ व्रत कार्तिक मास के कृष्णपक्ष की चन्द्रोदय व्यापिनी चतुर्थी के दिन रखा जाता हैं। यह व्रत पत्नी पति की दीर्घायु एवं अखण्ड सौभाग्य की प्राप्ति के उद्देश्य से रखती है। इस दिन महिला सामूहिक रूप से एकत्रित होकर भालचन्द्र गणेश जी की पूजा अर्चना की। करवाचौथ पर भी संकष्टीगणेश चतुर्थी की तरह महिलाये पूरे दिन निराहार रहकर रात में चन्द्रमा को अ‌र्घ्य देने के पश्चात ही भोजन करने का विधान है। कार्तिक कृष्ण पक्ष की चतुर्थी को करक चतुर्थी (करवा-चौथ) व्रत करने का विधान है। इस व्रत की विशेषता यह है कि केवल सौभाग्यवती स्त्रियों को ही यह व्रत करने का अधिकार है। स्त्री किसी भी आयु, जाति, वर्ण, संप्रदाय की हो, सबको इस व्रत को करने का अधिकार है। जो सौभाग्यवती (सुहागिन) स्त्रियाँ अपने पति की आयु, स्वास्थ्य व सौभाग्य की कामना करती हैं। यह व्रत 12 वर्ष तक अथवा 16 वर्ष तक लगातार हर वर्ष किया जाता है। इसकी अवधि पूरी होने के पश्चात इस व्रत का उद्यापन किया जाता है। जो सुहागिन स्त्रियाँ आजीवन रखना चाहें वे जीवनभर इस व्रत को कर सकती हैं। इस व्रत के समान अन्य कोई दूसरा सौभाग्यदायक व्रत नहीं है।

पति ने पत्नियों को दिए उपहार —–

करवाचौथ व्रत को लेकर बुधवार सुबह से महिलाओ में काफी उत्साह देखा गया। वही इस व्रत की रात्री पूजा के पश्चात पतियों ने अपनी पत्नियों को उपहार में सोने, चांदी के आभूषण एवं साड़ियां उपहार स्वरूप भेट कर सदा सुहागन रहने का आशीर्वाद दिया। इस पर्व की तैयारी को लेकर नगर के एमजी रोड स्थित ज्वैलरी की दुकानों पर महिलाओ का दिनभर तांता लगा रहा। इस पर्व पर पत्नियों की तैयारियों में पतियों ने भी भरपुर सहयोग दिया। इस दिन जहा महिलाओ ने बिना पानी, भोजन के व्रत किया। वही कई पतियों ने भी व्रत रखे। जिंन्होने अपनी पत्नियों को पानी पिलाने के बाद भोजन ग्रहण किया। इस अवसर पर जय स्तम्भ चोराहे स्थिति माँ दुर्गा मन्दिर में प्रतिवर्ष अनुसार इस वर्ष भी सिख समाज की अनेक महिलाओं ने एकत्रित होकर शाम करीब 5 बजे सार्वजनिक रूप से पूजन किया।जबकि सिख समाज की महिलाओ ने अपने पति की लंबी आयु के लिए मंदिर में एक दूसरे को थालिया बटाई कर इस परंपरा को बनाये रखा।

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