यह बात गलत है…

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आप जो यह तस्वीर देख रहे हैं, वह जिले की सीमा पर धार्मिक नगरी हंडिया का दृश्य है, जो इस प्राचीन स्थान की तुलना में यहां की व्यवस्था या यूं कहें कि मूलभूत सुविधाओं को दर्शाता है। दरअसल, ये हाल हंडिया बस स्टैंड से लगे खाली भूंखड का है। जहां कचरे को मानो डंप किया जाता है। इसे पंचायत का उदासीन रवैया कहना गलत नही होगा। परंतु यह भी गौर करने वाली बात है कि इसको लेकर अब तक आवाज नही उठी है। जबकि यह अव्यवस्था जनस्वास्थ्य के साथ खिलवाड़ है, जब आबादी क्षेत्र के नजदीक इतनी मात्रा में कचरा सड़ रहा है। जिसके चलते मच्छरों का पनपना लाजमी है। हालांकि इस बारे में ओर अधिक पुछ-परख करने के बावजूद कोई तीखी प्रतिक्रिया सामने नही आई। यहां बताना होगा कि धार्मिक नगरी हंडिया क्षेत्रवासियों समेत अन्य शहरों से आने वाले वाले श्रद्धालुओं की आस्था का केन्द्र हैं। यहां प्राचीनकाल की अनेक स्मृतियां अपनी अमिट छाप छोड़ रही हें। ऐसे में स्थल की महत्वता स्वत: बढ़ जाती है। बावजूद तहसील प्रशासन का सक्रिय रूप दिखाई नही पड़ रहा है। ऐसे में घाट एवं मंदिर के नजदीक गंदगी, सड़क किनारे अतिक्रमण, खुलेआम मांस-मझली का व्यापार समेत अन्य ऐसे कार्य पैर फैलाए खड़े हैं। जिन्हें उनकी हद में पहुंचाने की दरकार है। वह भी इसलिये, क्योंकि इन सबके चलते लोग कहना नही चूकते, कि यह बात गलत है।

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