अनोखा तीर, हरदा। शिक्षकों के लिए पात्रता परीक्षा टीईटी की अनिवार्यता के विरोध में मध्यप्रदेश शिक्षक संघ जिला हरदा के प्रतिनिधिमंडल ने मंगलवार को विधायक डॉ. आर.के. दोगने को उनके कार्यालय पहुंचकर ज्ञापन सौंपा। ज्ञापन में बताया गया कि सर्वोच्च न्यायालय द्वारा दिए गए निर्णय के अनुसार कक्षा 1 से 8 तक कार्यरत सभी शिक्षकों के लिए शिक्षक पात्रता परीक्षा अनिवार्य कर दी गई है, जिससे शिक्षकों की सेवा सुरक्षा, आजीविका और पदोन्नति पर विपरीत प्रभाव पड़ने की आशंका है। इससे शिक्षकों का मनोबल प्रभावित हो रहा है और विद्यालयीन शिक्षा की स्थिरता पर भी प्रतिकूल असर पड़ सकता है। ज्ञापन में उल्लेख किया गया कि शिक्षा का अधिकार अधिनियम 2009 तथा एनसीटीई के प्रावधानों के अंतर्गत वर्ष 2010 से पूर्व नियुक्त शिक्षकों को विधिक रूप से क्वालिफाइड और एक्सेम्प्टेड की श्रेणी में रखा गया था, जबकि वर्ष 2010 के बाद नियुक्त शिक्षकों के लिए निर्धारित अवधि में टीईटी उत्तीर्ण करना आवश्यक किया गया था। नवीन निर्णय में इन दोनों श्रेणियों के बीच के स्पष्ट विधिक अंतर की उपेक्षा की गई है। इस संदर्भ में शिक्षक संघ ने विधायक से अनुरोध किया कि वे मुख्यमंत्री से आग्रह करें कि राज्य सरकार का स्कूल शिक्षा विभाग सर्वोच्च न्यायालय में इस निर्णय के विरुद्ध पुनर्विचार याचिका दायर करे, ताकि प्रदेश के लगभग एक लाख शिक्षक-शिक्षिकाओं के हितों का संरक्षण किया जा सके। जिला अध्यक्ष गणेश पटवारे ने कहा कि शिक्षकों की गुणवत्ता बनाए रखना जितना आवश्यक है, उतना ही जरूरी उनकी सेवा सुरक्षा, सम्मान और वैधानिक अधिकारों की रक्षा करना भी है, जिन्होंने वर्षों से शिक्षा व्यवस्था को अपने समर्पण और कौशल से मजबूत किया है। ज्ञापन सौंपते समय जीआर चौरासिया संगठन मंत्री, नरेंद्र कुमार शाह वरिष्ठ पूर्व कोषाध्यक्ष, संभागीय, मुकेश मालवीय जिला सचिव, आरबी प्रजापति जिला कोषाध्यक्ष, रमेश मिश्रा, राजेश बीलिया, सूर्यकांत चोरे, गजानंद मालवीय सहित अन्य सदस्य उपस्थित रहे।
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