यह बात गलत है…

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आप जो यह तस्वीर देख रहे हैं, वह शहर में इन दिनों आम है। जब, होटल-रेस्टॉरेंट, हाथठेले तथा रहड़ियों पर चार-पान तथा खाद सामग्री का विक्रय करने वालों के यहां पेयजल व्यवस्था भगवान भरोसे है। हालांकि, ऐसा सभी होटलों पर नही है। शहर के कई प्रतिष्ठानों पर ग्राहकों को सुविधाओं समेत स्वस्थ व्यवस्थाओं का विशेष ख्याल रखा जाता है। परंतु अधिकांश जगहों पर यह उद्देश्य फेल नजर आते हैं। जबकि दुकानों के शुरूआती दौर में वहां ग्राहकों के लिये सुविधाओं की झड़ी देखने को मिलती रहीं हैं। किंतु बाद में जिम्मेदारियों के बोझ के चलते सारी व्यवस्थाएं धीरे-धीरे बेपटरी होने लगती हैं। जिसमें दुकान तथा उसके आसपास समुचित साफ-सफाई तथा अस्वच्छ पेयजल की गणना सबसे पहले होती है। बावजूद काम धंधे में लीन दुकानदार इन प्राथमिकताओं से पिछड़ा हुआ है। जिसका सीधा असर जनस्वास्थ्य पर पड़ना लाजमी है। बता दें कि शहर की दुकान तथा होटलों पर पेयजल व्यवस्था ध्वस्त है। मटकों के अंदर और बाहर काई छाई हुई है। वहीं वॉटर फ्रिज एवं नलों के वॉसबेेसिन गंदगी से ओतप्रोत दिख जाएंगे। जो कि आम जनमानस पर विपरीत प्रभाव डालते हैं। यही कारण है कि खान-पान से जुड़े इस मुद्दे पर लोग बेबाक कह देते हैं, कि यह बात गलत है।

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