अनोखा तीर, हरदा। दिगम्बर जैन धर्मावलंबियों के आत्म शुद्धि के पावन पर्व दशलक्षण धर्म मंगलवार तिथि पंचमी से प्रारंभ हो रहा है। पर्युषण महापर्व जिसे दशलक्षण पर्व भी कहा जाता है। इस दौरान दिगम्बर जैन समाज के सदस्य दस धर्म की पूजा अर्चना करेंगे। वहीं अपने सार्मथ्य अनुरूप तप साधना, उपवास व एकासना समेत अन्य आराधना करेंगे। जानकारी देते हुए जैन समाज के अध्यक्ष सुरेंद्र जैन ने बताया कि दस दिन चलने वाले इस पर्व में दिगम्बर जैन धर्मावलंबी द्वारा उत्तम क्षमा, उत्तम मार्दव, उत्तम आर्जव, उत्तम शौच, उत्तम सत्य, उत्तम संयम, उत्तम तप, उत्तम त्याग, उत्तम आंकिचन, उत्तम ब्रह्मचर्य धर्म की पूजा की जाती है। चूंकि प्रत्येक दिन एक धर्म की आराधना करते हुए उसे अपने जीवन में अंगीकार करते हैं, और साधना को निरंतर बढ़ाते चलते हैं, तो इन्हीं दस धर्मों के कारण इन्हें दसलक्षण महापर्व कहा गया है। इस दौरान प्रतिदिन विश्व कल्याण और आत्म शुद्धि के लिए मन्दिर में प्रातकाल श्रीजी का अभिषेक और पूजन अर्चन किया जाएगा। प्रतिदिन संध्या काल में संगीतमयी आरती कर भक्ति की जाएगी। इस बीच विद्वान पंडित द्वारा प्रवचन भी दिए जाएंगे। साथ ही समाज की महिला परिषद सांस्कृतिक कार्यक्रम कराएगी। श्री जैन ने बताया कि पर्व के समापन अवसर पर जैन समाज के सदस्य परम्परागत रूप से क्षमावाणी महोत्सव मनाएंगे।
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