गणेश पांडे, भोपाल। अनूपपुर वन मंडल में खरीदी में कमीशनबाजी को लेकर डीएफओ के खिलाफ एसडीओ और रेंजरों ने मोर्चा खोल दिया है। इस संदर्भ में सीसीएफ शहडोल लखन सिंह उईके ने जांच प्रतिवेदन वन बल प्रमुख को भेज दिया है। उधर, छिंदवाड़ा पश्चिम में वन विभाग के विभिन्न योजनाओं की राशि स्कूली बच्चों के खाते में जमा कर आहरण का मामला प्रकाश में आया है। इस मामले में डीएफओ छिंदवाड़ा पश्चिम ईश्वर रामहरि जरांडे ने एसडीओ से जांच कर दोषियों पर कड़ी कार्रवाई के निर्देश दिए हैं।
अनूपपुर वन मंडल में डीएफओ सुशील प्रजापति विरुद्ध एसडीओ
रेंजर्स के बीच द्वंद्व छिड़ा हुआ है। यहां पूरी लड़ाई खरीदी और उसे पर मिलने वाली कमीशनबाजी से जुड़ी है। सूत्रों का कहना है कि डीएफओ को मुख्यालय में बजट बांटने वाले एपीसीसीएफ का वरदहस्त है। ताजा मामला सर्च लाइट टॉर्च एवं बायना कूलर की खरीदी में गड़बड़ी होने की आशंका के चलते क्रय समिति के सदस्यों ने अपनी सहमति नहीं दी है। सूत्रों का कहना है कि जिस टार्च की कीमत बाजार में 6 हजार से 9 हजार के बीच में है, उसे 14 हजार से लेकर 15 हजार में खरीदा गया। यह खरीदी भी ग्वालियर की संस्था पोजिशनिंग और सॉल्यूशन ग्वालियर से हुई है। खरीदी में क्रय समिति के सदस्यों के हस्ताक्षर नहीं होने के कारण क्रय किए गए टॉर्च का भुगतान अभी तक नहीं हो पाया है। बताया जाता है कि डीएफओ ने अपनी खरीदी पर मोहर लगवाने के लिए बार-बार क्रय समिति को बदला भी किंतु खरीदी पर मोहर नहीं लग पाई। एक अधिकारी ने बताया कि भंडार क्रय नियमों के अनुसार पहले कृषि समिति द्वारा सामग्री का अनुमोदन होना चाहिए उसके बाद सामग्री का क्रय होना चाहिए। दिलचस्प पहलू यह है कि टॉर्च खरीदी में क्रय समिति के सदस्यों के हस्ताक्षर नहीं होने के कारण डीएफओ अनूपपुर सुशील प्रजापत ने एसडीओ और रेंजर के खिलाफ आरोप पत्र बनाकर प्रधान मुख्य वन संरक्षक मुख्यालय को भेज दिया है। प्रजापत ने अपने आरोप पत्र में एसडीओ और रेंजर पर धन वसूली कर राजसात किए गए वाहन छोड़ने के आरोप मढ़े हैं। डीएफओ और एसडीओ- रेंजर्स के बीच चल रहे द्वंद के चलते वन मंडल की विकास गतिविधियां ठप पड़ी हुई है।
गबन करने स्कूली बच्चो के नाम डाली सरकारी राशि
छिंदवाड़ा पश्चिम में बड़ा ही अनोखा मामला प्रकाश में आया है। इसमें वानिकी कार्यों में फर्जीवाड़ा करने के लिए स्कूली बच्चों को मोहरा बनाया गया है। यानी वानिकी कार्यों में फर्जीवाड़ा के लिए कथित श्रमिकों के नाम की राशि बच्चों के खाते में जमा करने आहरण की गई है। यह गड़बड़झाला झिरिपा रेंज में किया गया। शिकायत के मुताबिक परिक्षेत्र झिरपा में लाइन क्वाटर का गुणवत्ता हीन कार्य कर लगभग 20 लाख फर्जी तरीके से श्रमिकों के खाते से आहरण किए गए। इसी तरह झिरपा के व्यापारी प्रभुपाल के स्वयं एवं परिवार के प्रभु खाता क्र 200261010001100, रामकुमार/ प्रभु खाता क्र 200261030032149 शैलेन्द्र/ प्रभु खाता क्र-200261030022324 लगातार इन खातों में श्रमिकों के नाम पर नेटबैंकिंग के माध्यम से निम्न खातों से शासकीय राशि का लगातार लगभग 5 वर्षों से फर्जी राशि ट्रांसफर की जा रही है। जबकि खाताधारकों को अपने इन खातों में जमा आहरण कि जानकारी ही नहीं है। खाता क्र. आईडीएफसी बैंक खाता क्र.10002542266, 10002542006, 10002543383, 10002543452 में लाखों की राशि का लेनदेन हुआ है। आईडीएफसी बैंक 0041112 होशंगाबाद के इन खातों की जांच में खुलासा हो सकता है। सुरक्षा श्रमिक के नाम पर राशि भुगतान की जाती है एवं एक व्यक्ति के हर माह दो-दो खाते लगाये जाते है। संजय संपत खाता क्र 200261010004970, अरविन्द खाता क्र 200261030029554 जबकि अरविन्द नाम के किसी भी व्यक्ति को विगत दस वर्षों से परिक्षेत्र झिरपा में देखा ही नहीं गया। इसी तरह कर्मचारी नजीर मोहम्मद परिक्षेत्र झिरपा में परिक्षेत्र अधिकारी की अनुबंधित गाड़ी का ड्राईवर है जिसका भुगतान नजीर को वाहन मालिक द्वारा किया जाता है जबकि परिक्षेत्र कार्यालय द्वारा नजीर के खाते में हर माह सुरक्षा श्रमिक के नाम पर बिगत 4 वर्षों से राशि डालकर फर्जी तरीके से राशि आहरण की जाती है। नजीर मोहम्मद खाता क्र 200261010000852 की जांच में लाखो का लेनदेन हुआ है।
इनका कहना है…
स्कूली बच्चों के खाते में राशि जमा कर आहरण करने की जानकारी सामने आई है, इस मामले की एसडीओ से जांच कराई जाएगी। दोषी पाए जाने पर कड़ी कार्रवाई और राशि की वसूली की जाएगी।
ईश्वर रामहरि जरांडे, डीएफओ पश्चिम वनमंडल छिंदवाड़ा
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