अनोखा तीर, हरदा। बारिश के बाद बीते कुछ दिनों से वर्षा का दौर थम गया है। किसानों को इन दिनों खरीफ फसल के लिए वर्षाजल की आवश्यकता है। मगर मौसम के बदलते मिजाज से माना जा रहा है कि अब पानी गिरने की संभावनाएं क्षीण होने लगी हैं। रामचरितमानस में महाकवि तुलसीदास ने भी लिखा है – फूलहिं कांस सकल जग माही, ता वर्षा लगी बुढ़ानी। यानी कांस में फूल आने लगे तो समझ लें कि बारिश की विदाई का दौर आ गया है। इन दिनों जिले में आसपास खेतों के किनारे लगे कांस के पौधों में सफेद फूलों की बहार छा गई है। इस तरह प्रकृति ने भी वर्षा की विदाई का संकेत दे दिया है। यही वजह है कि अब मानसून की गतिविधियां लगभग थम सी गई हैं। मौसम विज्ञानियों के मुताबिक वातावरण में नमी बनी रहने के कारण आंशिक बादल जरूर दिखाई देते हैं। किंतु इनके बरसने की संभावना न के बराबर है। यहां अब धूप निकलने से भी दिन के तापमान में बढ़ोतरी होने लगी है।
किसानों की चिंता बढ़ी
मौसम वैज्ञानियों के अनुसार मानसून शिथिल हो गया है। इससे लगभग पूरे प्रदेश में वर्षा का दौर लगभग थम सा गया है। बादल छंटने से अब धूप निकलने लगी है। इससे दिन के तापमान में बढ़ोतरी होने लगी है। साथ ही वातावरण में कुछ उमस भी बढ़ने लगी है। मौजूदा स्थिति को देखते हुए अभी एक सप्ताह तक अच्छी बारिश होने की उम्मीद नहीं है। उधर बारिश नहीं होने से किसानों की चिंता बढ़ गई है।
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