खंडवा- आज इतिहास की नहीं इतिहास बोध की आवश्यकता है। आज की पीढ़ी केवल उपदेश नहीं सुनती। आजादी के विचार का सूत्रपात 14 वीं शताब्दी या भक्तिकाल में हुआ। तुलसीदास जी के विचारों में आजादी के विचारों की झलक विभिन्न उदाहरणों के माध्यम से झलकती है। उक्त विचार आजादी का अमृत महोत्सव अंतर्गत स्वतंत्रता संघर्ष एवं उसका देशव्यापी स्वरूप विषय पर नीलकंठेश्वर शासकीय स्नातकोत्तर महाविद्यालय में राजनीति विज्ञान विभाग एवं लोक प्रशासन विभाग के संयुक्त तत्वावधान में आयोजित एक दिवसीय संगोष्ठी में मुख्य वक्ता तथा देश के प्रसिद्ध साहित्यकार व्यंग्यकार कैलाश मंडलेकर ने व्यक्त किए।
मांडलेकर ने आजादी के आंदोलन में गांधी जी के द्वारा अहिंसा के प्रयोग से हुए चमत्कारिक परिवर्तन पर भी प्रकाश डाला। महाविद्यालय के अंग्रेजी विभाग के विभागाध्यक्ष डॉ एसपी सिंह ने विशेष वक्ता के रूप में अपने उद्बोधन में मुगलों से लेकर अंग्रेजी शासन काल तक भारत को किस तरह गुलाम बनाया गया। इसके कारणों पर प्रकाश डाला। किस तरह अंग्रेजों ने भारतीय शिक्षा और संस्कृति को नष्ट किया और गुलामी के क्या कारण थे? इस संबंध में विस्तार से चर्चा की। इसी क्रम में इतिहास विभाग की विभागाध्यक्ष डॉ रेखा गुंजन ने आजादी के आंदोलन में सभी वर्गों के योगदान तथा आजादी के गुमनाम नायकों के महत्वपूर्ण योगदान को याद किया।
महाविद्यालय के प्राचार्य डॉ गणेश प्रसाद दावरे ने कार्यक्रम का अध्यक्षीय भाषण देते हुए कहा कि आजादी के विचार हमारी संस्कृति में ही छुपे हुए है और आपसी मतभेद ही गुलामी का प्रमुख कारण रहे, उन्होंने मनुष्य में मनुष्यता की आवश्यकता पर बल दिया। कार्यक्रम का प्रारंभ करते हुए स्वागत उद्बोधन एवं अतिथि परिचय लोक प्रशासन विभाग के विभागाध्यक्ष वरिष्ठ प्राध्यापक डॉक्टर सुनील कुमार गोयल ने प्रस्तुत किया। कार्यक्रम का संचालन राजनीति विज्ञान विभाग की विभागाध्यक्ष डॉ. कृष्णा सोलंकी ने किया। इस अवसर पर महाविद्यालय के छात्र संजय कटारे और संजय बामनिया ने भी अपने विचार व्यक्त किए। अंत में राजनीति विज्ञान विभाग के डॉ बालकृष्ण विश्नोई ने सभी का आभार व्यक्त किया।
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