3 दिवसीय वनवासी लीला का समापन..
अनोखा तीर, हरदा। धर्म व संस्कृति से जनजातियों को जोड़कर रखने के लिए वनवासी चरित्रों पर आधारित लीलाओं का मंचन स्थानीय नेहरू स्टेडियम ग्राउंड पर आयोजित किया। तीन दिवसीय वनवासी लीला के समापन अवसर पर लक्ष्मण चरित्र का मंचन किया गया। अंतिम दिन गौंड जनजातियों का स्वरचित लक्ष्मण चरित्र का मंचन हुआ। इस लीला के तहत भगवान राम, लक्ष्मण और सीता के अलावा पांडवों का भी अहम किरदार दर्शाया गया। राम-लक्ष्मण व सीता की सहायता के लिए पांचों पांडव भी तत्पर दिखाई दिए। लक्ष्मण विवाह के लिए इंद्र लोक की कामिनी ने तांत्रिक लीलाओं का प्रदर्शन किया। इस दौरान कलाकारों का मंचन देखकर दर्शक मुग्ध हो गए। वहीं मां सीता की आज्ञानुसार लक्ष्मण द्वारा इंद्र की त्रिया फूल से विवाह का मंचन भी आकर्षक रहा।
पांडवों पर भंवरों का हमला
वनवासी लाला का मंचन दौरान त्रिया फूल व लक्ष्मण का अपहरण तथा भंवरों का पांडव भीम पर हमला तथा हनुमान जी से युद्ध भी मनोहारी था। वनवासी लीला गौंड जनजाति की कल्पना के आधार पर थी। इसके अनुसार गौंड भगवान राम को जहां सर्वव्यापी मानते हैं, वहीं लक्ष्मण को अपना आराध्य मानते हैं।
संस्कृति विभाग की प्रस्तुति
अंतिम दिन लक्ष्मण के विवाह को लेकर लीला का आयोजन किया गया। जिसकी उपस्थित दर्शकों ने भरपूर प्रशंसा की। उल्लेखनीय है कि मध्यप्रदेश शासन के संस्कृति विभाग द्वारा रामकथा साहित्य में वर्णित वनवासी चरित्रों पर आधारित वनवासी लीलाओं लक्ष्मण चरित्र, भक्तिमती शबरी और निषादराज की प्रस्तुतियां जिला प्रशासन के सहयोग से दी गई।

