मुकेश सोनी, आठनेर- विकासखंड की ग्राम पंचायत रजोला के ग्राम में सम्मिलित ग्राम पलासपानी में जलसंकट गहराया हुआ हैं। पानी के लिए मीलों चलकर ग्रामीण अपने जरूरत के लिए पानी जुटा रहे है। प्रतिवर्ष कमोबेस इन्हीं हालातों से ग्रामीणों को गुजरना पड़ता हैं। लेकिन ना तो शासन और ना ही प्रशासन कोई ठोस कदम उठा पाया हैं। पंचायती राज व्यवस्था में ग्राम की सरकार जिसे पंचायत कहते है उसके कंधो पर ग्राम की समस्या के निराकरण की जवाबदारी रहती है लेकिन ये पदाधिकारी भी अपने कार्यो के प्रति गंभीर नही रहते है, इसलिए ग्रामीणों को अपनी प्रारंभिक समस्याओं से बार-बार गुजरना पड़ता हैं। जल, जंगल और जमीन के लुभावन नारे ने प्रकृति के अस्तित्व को खतरे में डाल दिया हैं। हर बरस खेती का रकबा बढ़ रहा है इसका मतलब ये कतई नहीं है कि जमीन के भूभाग तो रबड़ की तरह खींचकर खेती योग्य बनाया जा रहा है अपितु हो यह रहा है कि जंगल की बेशकीमती एवं दुर्गम स्थानों की पहाड़ी जमीनों पर लहलहाते वृक्षों की बली चढ़ाकर वहां खेती की जा रही हैं। इसलिए प्राकृतिक संतुलन में बदलाव के कारण वर्षा, सूखा, अल्पवर्षा एवं अतिवर्षा की भयावहता से लोगों को गुजरना पड़ रहा हैं। पहाड़ी नदियों के जल को सिंचाई के लिए उपयोग में ले लेने से भी नदियां असमय ही सूख जा रही हैं। नदियों में पानी का अभाव बना रहता हैं। जो मानसून को प्रभावित करता हैं। ग्रामों में पानी की भयावहता का मंजर ये दिखाता है कि कितनी लापरवाही बरती जा रही हैं। ग्राम पंचायत रजोला के ग्राम पलासपानी में एकमात्र कुंआ पूरे गांव के जल समस्या का निराकरण कर रहा है। लेकिन नाकाफी हैं। लगभग तीन-चार वर्षों से ग्राम की नल-जल व्यवस्था ठप्प पड़ी है जिसके सुधार के लिए आज तक केई प्रयास नहीं किए गए हैं। कांग्रेस मण्डल अध्यक्ष जयनाथ अडलक ने बताया कि नल-जल व्यवस्था संचालन करने वाले ठेकेदार को कार्य मेें लापरवाही बरतने के चलते ब्लेक लिस्टेड कर दिया गया था तब से ग्राम की नल-जल व्यवस्था चरमरा गई हैं। पंच सरपंच एवं सचिव की उदासीनता का खामियाजा लोगों को भुगतना पड़ रहा हैं। इंसान तो इंसान पशुओं को भी पीने का पानी मयस्सर नहीं हो रहा हैं। पशुओं को दो-तीन किलोमीटर ताप्ती नदी पर ले जाकर पानी पिलाना पड़ता हैं। मानसून की लेटलतीफी से पानी का संकट और अधिक गहराने की उम्मीद हैं। ग्रामीणों ने मांग की है कि जल समस्या का निराकरण समय रहते नहीं हुआ तो पूरा ग्राम आगामी चुनावों का बहिष्कार करेगा जिसकी जिम्मेदारी शासन एव प्रशासन की होगी ।
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