आदिवासी सत्ता में अपनी भागीदारी चाहता है, भीख नहीं : उमंग

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अनोखा तीर, भोपाल। आदिवासी नेता एवं पूर्व मंत्री उमंग सिंगार ने अपने जोशीले भाषण में कांग्रेस के वरिष्ठ नेताओं और आदिवासी जनप्रतिनिधियों के बीच में यह स्पष्ट संदेश दिया कि मध्यप्रदेश में आदिवासियों की जनसंख्या 21 प्रतिशत है, 120 विधानसभा सीटों पर अपना प्रभाव रखते हैं। राज्य की सत्ता की चाबी भी आदिवासियों के हाथों में हैं, इसलिए हम चाहते हैं कि हमारी हिस्सेदारी भी जनसंख्या के आधार पर होनी चाहिए। प्रदेश कांग्रेस कार्यालय में लंबे अरसे बाद हुई आदिवासी विकास परिषद की बैठक में मध्य प्रदेश के प्रभारी महासचिव जेपी अग्रवाल, अखिल भारतीय अनुसूचित जाति जनजाति विभाग के अध्यक्ष के राजू, पूर्व मुख्यमंत्री दिग्विजय सिंह और कई आदिवासी विधायक एवं जनप्रतिनिधि उपस्थित थे। बैठक में पूर्व मंत्री ने कहा कि हम आदिवासी भीख नहीं मांगते। आदिवासी सत्ता और संगठन में अपनी हिस्सेदारी चाहता है। वह अपने गांव का विकास चाहता है। आदिवासी का प्रभाव आरक्षित 47 सीटों पर ही नहीं है, बल्कि 122 सीटों पर आदिवासी मतदाता जिताने और हराने का माद्दा रखते हैं। सिंगार ने कहा कि पेसा एक्ट क्रियान्वयन से अधिक जरूरी है छठी अनुसूची के प्रावधानों को मध्य प्रदेश में लागू किया जाए, क्योंकि छठी अनुसूची के प्रावधान में ही आदिवासियों के संरक्षण समाहित है। बीजेपी ने पैसा कानून के नाम पर सरकारी तंत्र का दुरुपयोग करके अपने लोग हर बूथ पर खड़े किए हैं। पैसा कानून में कोई अधिकार नहीं दिया आदिवासी बूथ पर बैठे लोग भाजपा के एजेंट हैं, उन्हें हटा दिया जाए। मैं इस परिषद के माध्यम से यह बात कहना चाहता हूं। अगर हमारा कार्यकर्ता हमारे लिए लड़ता है तो मैं उसके लिए जेल जाने के लिए भी तैयार हूं। इस पंक्ति के साथ अपने भाषण का समापन किया कि कहानियां तो राजा-महाराजाओं की लिखी जाती है, हम तो आदिवासी हैं हमारा इतिहास लिखा जाता है।

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