आप जो यह तस्वीर देख रहे हैं, वह मुख्यालय समेत यहां से गुजरे विभिन्न रूटों पर इन दिनों आम दृश्य है। जब नियमों को ताक पर रखकर लोडिंग वाहनों में मजदूरों को सवार कर यहां से वहां छोड़ा जाता है। कई वाहन लंबी दूरी से मजदूरों को यहां लेकर आते हैं, जो फसल कटाई तक क्षेत्र में ही रूकते हैं, फिर इसी तरह अपने गंतव्य को लौटते हैं। यह सिलसिला अभी-कभी नही बल्कि कई सालों से बदस्तूर जारी है। जिस पर अंकुश लगाने की दिशा में कोई प्रभावी कार्रवाई नही की जाती है। जिसके चलते संबंधितों में कार्रवाई का भय नही है। इस बारे में जानकारों की मानें तो क्षेत्र में फसल कटाई अथवा निर्माण कार्य संबंधी बड़ा काम होने पर मजदूरों को लाया जाता है। मजरे-टोले में रहने वाले ग्रामीणों को आने में समय ना लगे, इस लिहाज से लोग निजी वाहन जैसे ट्रेक्टर, पिकअप, लोडिंग ऑटो आदि का इस्तेमाल करते हैं। इन वाहनों में क्षमता से अधिक लोगों को सवार किए जाने पर दुर्घटना की आशंका को बल मिलता है। नागरिकों के मुताबिक ऐसी स्थिति में गाड़ी मालिक को वाहन के प्रायोजन अंतर्गत उसका इस्तेमाल करने की समझाइश देने के साथ ही नियमों का पाठ पढ़ाने की जरूरत है। क्योंकि इन सबके अभाव में जनता का यह कहना गलत नही है, कि यह बात गलत है।

