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Tuesday, 13 October 2026
खंडवा

समर्थ शिशु रामकथा में पंडित श्याम स्वरूप मनावत ने कहा

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खंडवा। समर्थ शिशु रामकथा के पंचम विराम दिवस पर विभिन्न बालको के चरित्र का वर्णन करते हुए पंडित श्याम स्वरूप जी मनावत ने कहा कि बच्चों को 5 वर्ष तक भरपूर लाड़ प्यार देना चाहिए, 13 वर्ष की आयु तक उन्हें विधि निषेध अर्थात सही और गलत का अभ्यास कराना चाहिए। बच्चों को 6 वर्ष तक के आयु तक सिर्फ स्वयं सीखने दे उन्हें सिखाना कुछ भी नहीं है। पढ़ाने के चक्कर में हम बच्चों का बचपन छीन रहे हैं। गूगल सिर्फ सूचना दे सकता है संस्कार नहीं, इसलिए गुरु तत्व की महिमा कभी समाप्त नहीं होगी। पंडित मनावतजी ने लव, कुश, ध्रुव और प्रह्लाद के बाल्यकाल को चित्रित करते हुए वर्णन करते हुए उनकी कथाएं सुनाई। उन्होंने कहा कि जो सद्गुरु होते हैं वही अपने लिए अच्छे शिष्य स्वयं ढूंढ लेते हैं। समर्थ स्वामी रामदास और शिवाजी, चाणक्य और चंद्रगुप्त तथा स्वामी रामकृष्ण परमहंस और स्वामी विवेकानंद का उदाहरण देते हुए यह बात कही।

जब तक राजाओं की गोद में नीति के जाये नहीं बैठेंगे और रुचि के जाये ही बैठते रहेंगे तब तक राजनीति का उद्धार संभव नहीं है । प्रतिशोध का भाव पतन का कारण बनता है और बदला लेने का भाव आसुरी वृत्ति है, इसलिए ना स्वयं गिरे न दूसरों को गिराने का प्रयास करें, नीचे गिरना स्वाभाविक वृत्ति है लेकिन हम अपनी पीढिय़ों की सीढियाँ बनाकर कि बनकर उनका उद्धार करने में लग जाए।

वर्तमान में चल रहे समलैंगिक विवाह कानून को उन्होंने भारतीय संस्कृति पर अंतरराष्ट्रीय षडय़ंत्र बताते हुए कहा कि इस प्रकार के कानून भारत की संस्कृति को नष्ट करेंगे। क्योंकि यह शरीर केवल शारीरिक भोग का साधन नहीं है। यह संस्कार का केंद्र है और हम इस कानून का पुरजोर विरोध करते हैं। इस प्रकार का कोई कानून भारत में नहीं बने। उन्होंने कहा कि सत्संग से पात्रता बढ़ती है और संगति से स्वभाव बदलता है। गुरु और ट्यूटर दोनों में अंतर बताते हुए भी उन्होंने शिक्षा की महत्ता को प्रतिपादित किया। समापन दिवस पर कथा में महामंडलेश्वर स्वामी विवेकानंद पुरी का आगमन हुआ। कथा में विधायक देवेंद्र वर्मा, नगर निगम अध्यक्ष अनिल विश्वकर्मा, राजेन्द्र अग्रवाल, रविन्द्र बंसल, भूपेन्द्र सिंह चौहान,योगिता माहेश्वरी, विमल खंडेलवाल, रविन्द्र चांडक, धर्मेन्द्र दांगोड़े, ओमप्रकाश दशोरे, भावेश बिल्लोरे, शोभा तोमर, दिलीप सपकाले, जितेन्द्र महाजन, प्रदीप कानूगो, वासुदेव पँवार, नवनीत अग्रवाल, आदित्य मेहता, श्रीराम पटेल सहित बड़ी संख्या में नगरजन सम्मिलित हुए।

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