अनोखा तीर, बैतूल। आसमान से बरसी आफत ने बैतूल जिले के आमला तहसील के कई गांवों को अपनी चपेट में ले लिया। रविवार को दोपहर तीन बजे गरज-चमक के साथ ओले बरसने का सिलसिला शुरू हुआ तो थमने का नाम ही नहीं लिया। 20 से 25 मिनट तक कहीं बेर तो कहीं पर आंवले के आकार के ओलों की बारिश से हर तरफ बर्बादी फैल गई। ओलावृष्टि और बारिश के कारण सड़क से लेकर खेतों में ओलों की सफेद चादर ही नजर आ रही थी। हालत यह हो गई कि घरों की छतों पर ओलों की मार के कारण खपरैल टूट गए और सीमेंट की शीटें भी क्षतिग्रस्त हो गईं।
आमला के रविकांत उघड़े ने बताया कि ग्राम पंचायत जमदेही, लादी समेत अन्य क्षेत्रों में रविवार दोपहर करीब तीन बजे अचानक मौसम का मिजाज बदल गया और तेज हवा के साथ हल्की वर्षा प्रारंभ हो गई। कुछ ही देर में ओले बरसने लगे। खेतों में मौजूद किसानों और मजदूरों ने जैसे-तैसे स्वयं को मकानों में जाकर सुरक्षित किया। ओले इतनी अधिक मात्रा में गिर रहे थे कि घरों की खपरैल वाली छतें टूट गई। कई लोगों के घरों की छतों पर लगी सीमेंट की शीट भी क्षतिग्रस्त हो गई। ओलावृष्टि के कारण खेतों में पककर खड़ी गेहूं की फसल को खासा नुकसान पहुंचा है। खेतों में काटकर रखी गेहूं की फसल की बालियां भी ओलों की मार के कारण टूटकर बिखर गई हैं।
क्षेत्र में सब्जी की खेती करने वाले किसानों को भी खासा नुकसान पहुंचा है। आमला विकासखंड के रतेड़ाकला ग्राम पंचायत के अंतर्गत आने वाले ग्रामों में भी ओलावृष्टि से फसलों को बेहद नुकसान हुआ है। ग्राम बाराखारी, सम्मूढाना में सबसे अधिक नुकसान बताया जा रहा है।
बाराखाड़ी में सबसे अधिक नुकसान
जमदेही ग्राम पंचायत के अंतर्गत आने वाले ग्राम बाराखाड़ी सम्मूढाना में ओलों की बारिश से सबसे अधिक नुकसान हुआ है। गांव के दुर्गेश यादव ने बताया कि करीब 20 से 25 मिनट तक ओले बरसते रहे। इससे गेहूं, चना, गन्ना, सब्जी की फसलें तो पूरी तरह से तबाह हो गई हैं। गांव में पेड़ के नीचे बंधा एक बैल की भी ओलों की मार के कारण मौत हो गई है। बारिश और ओलावृष्टि बंद होने के बाद किसान खेतों में पहुंच रहे हैं जिससे नुकसान का आंकड़ा और भी बढ़ने की आशंका है। इधर शाहपुर क्षेत्र में भी दोपहर में जमके बारिश हो गई है, जिससे किसानों को भारी नुकसान होने की खबर है।

