अनोखा तीर, हरदा। क्षेत्र में शुक्रवार को गणगौर उत्सव के समापन अवसर पर जगह-जगह धार्मिक आयोजनों की धूम रही। इस दिन माता माय को लोगों ने भक्तिभाव के साथ विदा किया, वहीं खुशी-खुशी अगले बरस आने का न्यौता भी दिया। इन सबके बीच शहर का एक ऐसा परिवार है, जहां गणगौर की विशेष पूजा-अर्चना होती है। घंटाघर स्थित तापडिया परिवार में यह परम्परा 200 साल से निभा रहे हैं। शील सप्तमी से तीज तक गणगौर उत्सव मनाया जाता है। इस दौरान गण और गौरा की आकृति सजाई जाती है। जिसकी महिलाओं द्वारा संयुक्त रूप से नियमिति पूजा की जाती है। परिवार के विजय तापड़िया ने बताया कि यह परम्परा सालों से जारी है। करीब 20 साल पहले राजस्थान के बीकानेर से लगभग 7-8 परिवार हरदा आए थे। तभी से यह सभी परिवार गणगौर उत्सव मनाते आ रहे हैं। तीन दिवसीय धार्मिक कार्यक्रम दौरान महिलाएं पारंपरिक गीत गाती है। वहीं गणगौर की कथा भी सुनाई जाती है। परिवार की 75 वर्षीय महिला सदस्य ने बताया कि पुत्र-पुत्री के लिये योग्य जीवनसाथी मिले, इसी कामना के साथ पूजा की जाती है। साथ ही परिवार में सुख, समृद्धि एवं भाईचारे की मंगलकामनाएं भी करते हैं। उन्होंनें बताया कि अंतिम दिन यानि शुक्रवार 24 मार्च को गणगौर माय को भावभीनी विदाई दी। इस मौके पर महिलाओं ने ज्वारों को नदी में विसर्जन किया। इस दौरान बड़ी संख्या में महिलाएं उपस्थित थी।

