अनोखा तीर, मसनगांव। आजादी के आंदोलन में अविभाजित होशंगाबाद के जिले के ग्राम मसनगांव का भी अपना एक इतिहास रहा है। जब आंदोलन की आग गांव तक पहुंची तो यहां के रणबांकुरे ने भी अपना घर बार छोडकऱ स्वतंत्रता के आंदोलन में कूद पड़े। अंग्रेजों की यातनाएं सही, कई बार जेल गए, परंतु साहस नहीं खोया। इसी का परिणाम है कि अविभाजित होशंगाबाद जिले में सबसे अधिक स्वतंत्रता संग्राम सेनानी होने का श्रेय मसनगांव को जाता है। जहां युवाओं की टीम में रामेश्वर अग्निभोज, रामप्रसाद अग्निभोज, शिवलाल अग्निभोज, रामलाल अग्निभोज, हरकिशन रामनारायण गुर्जर, शालिग्राम सीताराम गुर्जर, गोपीकिशन रामकरण जोशी, रामसिंह रोडमल सोनी, नाथूराम रामलाल जोशी, शिवनारायण रामकरण बांके, भगवानदास रामकरण बांके, दौलतसिंह प्रहलाद सिंह ठाकुर ने बढ़-चढकऱ हिस्सा लिया और अंग्रेजों से लड़ाई लड़ी। इनमें से कई लोगों को स्वतंत्रता संग्राम सेनानियों की उपाधि मिली तो कई लोग बगैर उपाधि के ही चले गए, परंतु ग्राम के इतिहास में इनका नाम अमर हो गया। आज भी जब कभी स्वतंत्रता आंदोलन की बात होती है तो ग्राम के इन रणबांकुरे को हमेशा याद किया जाता है, जिनके दम पर मसनगांव का नाम गौरवान्वित होता है, इतिहास के पन्नो पर अमिट छाप छोडकऱ भले ही यह चले गए, परंतु इतिहास के पन्नो पर लिखे इनके नाम से युवाओं को हमेशा प्रेरणा मिलती है। विगत दिनों सरकार के द्वारा आजादी के अमृत महोत्सव मनाने के लिए किए गए कार्यक्रमों में इनके परिजनों का सम्मान किया गया।
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