अनोखा तीर, हरदा। 6 जुलाई को सम्पन्न हुए नगरीय निकाय चुनाव की मतगणना रविवार सुबह 9 बजे प्रारंभ होगी। हरदा नगरपालिका एवं तीनों ही परिषद की मतगणना के पुख्ता इंतजाम प्रशासन ने कर लिए है। इस बार के नगरीय निकाय चुनाव में पार्षदों को ही अध्यक्ष का चुनाव करना है। इसलिए सभी की निगाहें दोनों ही प्रमुख दलों के पार्षदों पर टिकी हुई है, क्योंकि जिसके भी ज्यादा पार्षद जीत कर आते है उस दल का अध्यक्ष बनना तय दिखाई दे रहा है। हालांकि इस बार के चुनाव में दोनों ही प्रमुख दलों के समीकरण निर्दलीय और आप के प्रत्याशी ने बिगाड़ रखे है। अभी तक कोई भी स्पष्ट रुप से यह दावा नहीं कर पा रहा है कि हमारी ही सरकार बनेगी। हरदा नगरपालिका की ही बात करें तो यहां के ३५ वार्डों में दोनों ही प्रमुख दल भाजपा और कांग्रेस अपनी-अपनी जीत का दावा कर रहे है। पिछले चुनाव से इस बार कम मतदान होने से कोई भी सही आंकलन लगाने में असफल साबित हो रहा है। भाजपा ने जहां अपनी जीत का दावा करते हुए आगामी नगरपालिका अध्यक्ष श्रीमती भारती राजू कमेडिया को कृषि मंत्री कमल पटेल ने खुद घोषित किया है, वहीं कांग्रेस ने श्रीमती सुप्रिया पटेल को अपना आगामी नगरपालिका अध्यक्ष बताया है। नगरपालिका के हुए इस चुनाव में यदि संख्याबल में भाजपा बाजी मार भी लेती है तो अध्यक्ष के लिए मारामारी तय नजर आ रही है, क्योंकि खुद भाजपा जिलाध्यक्ष अमरसिंह मीणा ने भी अपनी पत्नी श्रीमती आशा मीणा को भी वार्ड पार्षद का चुनाव लड़वाया है। इसी तरह भाजपा के कद्दावर नेता देवीसिंह सांखला की धर्मपत्नी श्रीमती कैलाश सांखला और लगातार पार्षद चुनाव जीत रही श्रीमती अनिता अशोक राठौर का भी दावा मजबूत नजर आता है। इन्हीं सबके बीच एक नाम और चौकाने वाला हो सकता है वह है श्रीमती रक्षा मुन्नालाल धनगर का। जिन्हें भाजपा ने पहले टिकिट ही नहीं दिया था। उनकी जगह उनके पति मुन्नालाल धनगर को प्रत्याशी बनाया गया था। पार्टी ने बी फार्म भी उन्हीं के नाम से जारी किया था, लेकिन आखरी समय में इसमें उलटफेर हुआ। निर्वाचन ने पत्नी का नामांकन जमा किया होने से भाजपा द्वारा बाद में उनकी पत्नी श्रीमती रक्षा धनगर के नाम से बी फार्म जारी कर उन्हें प्रत्याशी बनाया गया था। इसे देखते हुए ऐसा लग रहा है कि कहीं न कहीं यदि उलटफेर हुआ तो इसका लाभ श्रीमती रक्षा धनगर को मिल सकता है।
टिमरनी के वार्ड नं. ६ में है अध्यक्षीय मुकाबला
टिमरनी नगर परिषद की बात करें तो यहां के १५ वार्डों में मुख्य मुकाबला कांग्रेस और भाजपा के बीच ही है। लेकिन निर्दलीय प्रत्याशी यहां पर समीकरण बिगाड़ सकते है। जिसमें सबसे चर्चित नाम अखिल भारतीय कांग्रेस कमेटी के सदस्य अरूण जायसवाल के पुत्र पुनीत जायसवाल का है, जो निर्दलीय रुप से चुनाव लड़ रहे है। टिमरनी नगर परिषद के पूरे चुनाव में सबसे चर्चित वार्ड क्रं. ६ रहा है। शहर की जनता इसे पार्षद चुनाव न मानकर अध्यक्ष का चुनाव मान रही थी, क्योंकि इस वार्ड में पूर्व नगरपालिका अध्यक्ष सुभाष जायसवाल कांग्रेस से चुनाव लड़ रहे थे, वहीं विधायक प्रतिनिधि सुनील दुबे भाजपा से चुनाव मैदान में उतरे थे। दोनों ही प्रत्याशियों के बारे में यह माना जा रहा है कि इनमें से जो भी जीतेगा उसका नगरपालिका अध्यक्ष बनना तय है। टिमरनी परिषद के हुए इस चुनाव से पूर्व भाजपा को भारी अंर्तविरोध का भी सामना करना पड़ा है। लगभग १०० भाजपाईयों ने टिकिट वितरण से नाराज होकर इस्तीफे तक दे दिए थे। अब देखना यह है कि भारी अंर्तविरोध के बावजूद जनता भाजपा को जीताती है या कांग्रेस पर अपना विश्वास व्यक्त करती है।
खिरकिया में क्या खत्म होगा भाजपा का वनवास
१२ सालों से कृषि मंत्री के गृह क्षेत्र की नगर परिषद खिरकिया पर कांग्रेस का कब्जा रहा है। सीधे अध्यक्ष चुनाव में पहले कांग्रेस के रमेश लोमारे अध्यक्ष बने थे, वहीं दूसरे कार्यकाल में कांग्रेस की श्रीमती यशोदा पाटिल अध्यक्ष रही है। हालांकि इस बार परिस्थितियां जुदा है। सीधे अध्यक्ष के चुनाव नहीं होना है। अधिक पार्षदों की जीत से ही भाजपा का परचम खिरकिया में फहरा सकता है। इस बार के नगर परिषद चुनाव में भाजपा की स्थिति सुदृढ़ नजर आ रही है। हालांकि अधिक पार्षद जीतने पर भाजपा में अध्यक्ष को लेकर मारामारी होना तय है, क्योंकि यहां भाजपा के दिग्गज नेता अपनी पत्नी और बहू के माध्यम से पार्षद चुनाव में अपनी किस्मत आजमा रहे है। जिसमें श्रीमती नेहा रविन्द्र दुआ, श्रीमती सोनम सोनी, श्रीमती लक्ष्मी यादव और श्रीमती इंद्रजीत कौर प्रमुख रुप से दावेदार है। वहीं कांग्रेस में पूर्व नगरपालिका उपाध्यक्ष संग्राम सिंह इरलावत की बहू श्रीमती वंदना इरलावत भी अध्यक्ष की दावेदारी भी प्रमुख रुप से सामने आई है। हालांकि अभी इनको पहले पार्षद चुनाव जीतना है। कल के परिणामों के बाद ही कुछ तस्वीर साफ हो पाएगी।
सिराली में किसकी बनेगी पहली नगर सरकार
ग्राम पंचायत से नगर परिषद का दो वर्ष पूर्व दर्जा प्राप्त कर चुकी नगर परिषद सिराली में पहली बार चुनाव सम्पन्न हुए है। पहली बार हुए इस चुनाव में पूर्व जिले में सबसे ज्यादा ८४ प्रतिशत से अधिक मतदान सिराली में हुआ है। जिसे देखकर कोई भी यह आंकलन नहीं लगा पा रहा है कि इस बार किसकी सरकार बनेगी। १० वार्डों की इस परिषद में २-३ निर्दलीय उम्मीदवार भाजपा और कांग्रेस पर भी भारी होते हुए दिखाई दिए है। छोटी सी इस नगर परिषद का प्रथम नागरिक बनने के लिए होड़ सी मची हुई है। यहां पर सबसे चर्चित नामों की बात की जाए तो भाजपा की ओर से अध्यक्ष पद के लिए दो नाम सामने आ रहे है। जिसमें कैलाशचंद्र अग्रवाल की धर्मपत्नी श्रीमती अनिता अग्रवाल और समाजसेवी कुंजबिहारी सोमानी की धर्मपत्नी श्रीमती अनुराधा सोमानी का नाम है। यहां पर कांग्रेस की बात की जाए तो कांग्रेस के वरिष्ठ नेता हुकुम भायरे की पुत्रवधु श्रीमती उमा भायरे और आशीष भायरे की धर्मपत्नी श्रीमती ज्योति भायरे का नाम अध्यक्ष के लिए लिया जा रहा है। लेकिन देखने वाली बात यह रहेगी कि सिराली नगर परिषद में दोनों ही दलों को स्पष्ट बहुमत मिल पाता है या नहीं। कहीं यहां पर निर्दलीय ही किंगमेकर की भूमिका में न आ जाए।

