राजस्व-वन भूमि विवाद पर सर्वोच्च न्यायालय के आदेश का साल भर बाद भी नहीं हुआ पालनराजस्व-वन भूमि विवाद पर सर्वोच्च न्यायालय के आदेश का साल भर बाद भी नहीं हुआ पालन

 रिटायर्ड आईएफएस डबास ने वन बल प्रमुख सेन को पत्र लिखकर पीसीसीएफ अग्रवाल की कार्यशैली पर उठाया सवाल
गणेश पांडे, भोपाल। मप्र में 15 मई 25 को सर्वोच्च न्यायालय ने आदेश दिया कि वन विभाग के कब्जे के बाहर ऐसी भूमि जो वन भूमि के रूप में अधिसूचित है तथा जो राजस्व विभाग के कब्जे में है या जिसे राजस्व विभाग द्वारा निजी व्यक्तियों/ संस्थाओं को आवंटित किया गया है, ऐसी समस्त वन भूमियों को आदेश दिनांक से एक साल के भीतर वन विभाग को प्रबंधन के लिए सोंपे। सुप्रीमकोर्ट के आदेश का हवाला देते हुए तत्कालीन एसीएस अशोक वर्णवाल ने सभी कमिश्नर कलेक्टर और समस्त वन विभाग के अधिकारियों के नाम एक परिपत्र जारी किया और साल भर अभियान चला कर राजस्व के कब्जे वाली समस्त वन भूमि भले ही वह किसी निजी संस्था और व्यक्ति को आवंटित की गई हो, उसे वन विभाग को सौंपी जाए। साल भर बाद अब रिटायर्ड आईएफएस आज़ाद सिंह डबास ने वन बल प्रमुख शुभ रंजन सेन को पत्र लिखकर पीसीसीएफ अग्रवाल की कार्यशैली पर उठाया सवाल उठाए है।  वन बल प्रमुख सेन को लिखे पत्र में रिटायर्ड एपीसीसीएफ डबास ने 5 जून 25 जून के एसीएस अशोक वर्णवाल द्वारा उस पत्र का भी उल्लेख किया है, जो कि उच्चतम न्यायालय के आदेश के सन्दर्भ में मैदानी अफसरों को जारी किया गया था। रिटायर्ड एपीसीसीएफ डबास ने वन बल प्रमुख सेन को बताया कि साल भर बीत जाने के बाद भी सुप्रीम कोर्ट के फैसले और एसीएस के निर्देश का पालन नहीं हुआ है। पत्र में डबास ने कहा है कि ऐसी जानकारी प्राप्त हुई है कि माननीय सर्वोच्च न्यायालय के उपरोक्त आदेश एवं अपर मुख्य सचिव, वन के निर्देशों के पालन में वन विभाग के मैदानी अधिकारियों द्वारा आज दिनांक तक कोई कारगर कार्रवाई नहीं की गई है जिसके फलस्वरूप वन विभाग की बेशकीमती जमीन या तो राजस्व विभाग के अवैध कब्जे में बनी हुई है या इस भूमि पर अवैध अतिक्रमण है जो अत्यंत ही आपत्तिजनक है।

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